
नई दिल्ली :इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ कमांडरों की मौत के बाद ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई से पूरी दुनिया को दहला दिया है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मध्य पूर्व के 8 देशों में मौजूद 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर एक साथ मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. जिन देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है उनमें बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान शामिल हैं. ईरान ने साफ किया है कि उसका मकसद पड़ोसी देशों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी सेना को मिटाना है. इन हमलों के बाद अब सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे पूरा क्षेत्र जंग के मैदान में तब्दील हो गया है.
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने सीएनएन से बात करते हुए इस हमले को ईरान की मजबूरी बताया है. उन्होंने कहा कि ईरान सीधे तौर पर अमेरिकी धरती तक नहीं पहुंच सकता, इसलिए उनके पास अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सैन्य ठिकानों पर हमला करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. ईरान का तर्क है कि अमेरिका ने उनके सबसे बड़े नेता की हत्या कर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है और अब अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी होगी. इस बयान से साफ है कि ईरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और वह खाड़ी देशों में मौजूद हर उस जगह को निशाना बनाएगा जहां अमेरिकी झंडा लहरा रहा है.