फगवाड़ा 7 मई (शिव कौड़ा) फगवाड़ा पुलिस द्वारा कोविड-19 को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के आरोप में सुप्रसिद्ध कामेडी आर्टिस्ट सुगंधा मिश्रा सहित अन्यों पर दर्ज केस को पक्षपात पूर्ण रवईया बताते हुए जनता न्यायिक महासभा के संस्थापक चेयरमैन एडवोकेट रोहित शर्मा ने कहा कि पुलिस की यह मुस्तैदी राजनेताओं से संबंधित मामलों में दिखाई न देना पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्रचिन्ह खड़े करता है। शहर में कई अन्य मामले भी हैं जहां सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा अनेकों बार कोविड को लेकर जारी नियमों का सरेआम उल्लंघन किया गया लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि कोविड-19 प्रतिबंधों की गाज सर्वाधिक सनातन हिन्दू धर्म के संस्कारों पर गिर रही है। हिन्दू धर्म में विवाह संस्कार एवं मृत्योपरांत अंतिम संस्कार को पवित्र मंत्रोचारण के साथ अमल में लाया जाता है। हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह के सात फेरे तारों की छांव में रात्रि के अंतिम पहर में करने का प्रावधान है लेकिन सरकार की ओर से रात को विवाह समागमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जिससे हिन्दू समाज अपनी रीति के अनुसार विवाह संपन्न करने से वंचित हो रहा है। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ तुरंत केस दर्ज कर दिया जाता है जो अनुचित है। इसी प्रकार मृत्यु के समय भी विशेष मंत्रोच्चारण के साथ दाह संस्कार होता है लेकिन कोविड-19 संक्रमण से जान गंवाने वालों का अंतिम संस्कार लावारिस लाशों के रूप में किया जाना निंदनीय है। कई बार तो रात के अंधेरे में ही शव को जला दिया जाता है जो शव का अनादर करने के समान है। एडवोकेट शर्मा ने पंजाब की कैप्टन अमरेन्द्र सिंह सरकार से पुरजोर अपील कर कहा कि सनातन हिन्दू समाज की भावनाओं का आदर किया जाए और साथ ही कोविड को लेकर जारी नियमों का उल्लंघन करने वाले रसूखदार सियासी लोगों पर भी उसी तरह सख्ती की जाए जैसे आम लोगों के साथ होती है। तभी सरकार के प्रति जनता का विश्वास कायम रह सकेगा।
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