
नवदुर्गा का पांचवां स्वरुप स्कंदमाता का है. कार्तिकेय (स्कन्द) की माता होने के कारण इनको स्कन्दमाता कहा जाता है. यह माता चार भुजाधारी कमल के पुष्प पर बैठती हैं. इसलिए इनको पद्मासना देवी भी कहा जाता है. इनकी गोद में कार्तिकेय भी बैठे हुए हैं. इसलिए इनकी पूजा से कार्तिकेय की पूजा स्वयं हो जाती है. इस बार मां के पांचवें स्वरूप की उपासना 17 अप्रैल को होगी.स्कंदमाता की पूजा से संतान की प्राप्ति सरलता से हो सकती है. इसके अलावा अगर संतान की तरफ से कोई कष्ट है तो उसका भी अंत हो सकता है. स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल अर्पित करें तथा पीली चीज़ों का भोग लगाएं. अगर पीले वस्त्र धारण किये जाएं तो पूजा के परिणाम अति शुभ होंगे. इसके बाद संतान संबंधी प्रार्थना करें
इस दिन पीले वस्त्र धारण करके पूजा करें. इस दिन पूजा में पीली वस्तुओं का प्रयोग करें. इस दिन पति पत्नी अगर एक साथ पूजा करें तो संतान प्राप्ति सरलता से हो सकती है. अगर संतान से जुडी हुयी कोई समस्या है तो इस दिन की पूजा से वो भी दूर हो सकती है. इस दिन की पूजा से माता पिता और संतान के बीच के रिश्ते प्रगाढ़ होते हैं