जालंधर: सिविल अस्पताल में लगातार बढ़ रही लापरवाहियों के मामलों में यदि कोई जांच कमेटी बैठती है, तो देखने में आता है कि कमेटी पूरी कोशिश करती है कि उनके कैडर पर कोई आरोप सिद्ध न हो। उक्त आरोप लगाते हुए रेलवे रोड मार्केट एसोसिएशन के प्रधान ललित मेहता ने बताया कि कुछ महीने पहले सिविल अस्पताल वार्ड में भर्ती मरीज, जिनकी पहचान अनमोल और उदय के तौर पर हुई थी, को अस्पताल प्रशासन के इशारे पर अस्पताल के मेन गेट के बाहर फेंक दिया गया। सर्दी के कारण दोनों की हालत और बिगड़ने लगी। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण अनमोल की मौत हो गई। ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसलिए उन्होंने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग से की।इस मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन कार्यालय से मेडिकल सुपरिंटैंडैंट के कार्यालय में एक जांच कमेटी गठित की गई, जिसने जो रिपोर्ट पेश की, वह चौंकाने वाली है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि वार्ड अटैंडेंट ओमप्रकाश ने मरीजों को रोकने की कोशिश नहीं की, न ही डॉक्टर या स्टाफ को सूचित किया। इसके अलावा, पेस्को सुरक्षा गार्ड अवतार सिंह ने भी अपना कर्तव्य ठीक से नहीं निभाया क्योंकि अस्पताल से बाहर आए दोनों मरीजों को अस्पताल वापस भेजने के बजाय उन्हें रैन बसेरा जाने की अनुमति दे दी।

Disclaimer : यह खबर उदयदर्पण न्यूज़ को सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई है। उदयदर्पण न्यूज़ इस खबर की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं करता है। यदि इस खबर से किसी व्यक्ति अथवा वर्ग को आपत्ति है, तो वह हमें संपर्क कर सकते हैं।