जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में संपूर्ण फलदाई अलौकिक हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा आए हुए सभी मुख्य यजमानों से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

माँ बगलामुखी धाम में आयोजित मासिक अलौकिक हवन-यज्ञ के पावन अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने श्रद्धालुजनों को भाव-विभोर करते हुए कहा आज मैं कोई कठिन ज्ञान नहीं, दिल की बात करने आया हूँ।
उन्होंने बड़े मार्मिक शब्दों में कहा कि हम सब मंदिर आते हैं, माथा टेकते हैं, दीप जलाते हैं, लेकिन क्या कभी ऐसा हुआ कि प्रभु को याद करते-करते आँखों से आँसू अपने आप बह निकले? यदि नहीं, तो समझिए कि भक्ति की यात्रा अभी शुरू ही नहीं हुई।
उन्होंने समझाया कि प्रभु को पाने के लिए न बड़े ग्रंथों की आवश्यकता है, न ऊँचे तर्कों की, और न ही दिखावे की भक्ति की। प्रभु को चाहिए केवल एक सच्चा, पिघला हुआ हृदय। आज मनुष्य धन, मान और प्रतिष्ठा के पीछे भाग रहा है, लेकिन प्रभु प्राप्ति के लिए केवल उपाय खोजता है, अनुभव नहीं।
उन्होंने इस भाव को एक पंक्ति के माध्यम से स्पष्ट किया, ‘‘रोए बिना न मिले हरि, चाहे कर ले लाख उपाय।’’
इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि यह रोना साधारण आँसू नहीं, बल्कि उस आत्मा की पुकार है जो अपने परम स्रोत से बिछुड़ गई है। चाहे लाख जप-तप कर लें, यदि हृदय में तड़प और दर्द नहीं है, तो प्रभु केवल शब्दों तक सीमित रह जाते हैं, जीवन में नहीं उतरते।
एक सुंदर उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा—जब बच्चा रोता है तो माँ दौड़ी चली आती है। उसी प्रकार जब जीव सच्चे हृदय से पुकारता है, तो परमात्मा भी ठहर नहीं पाते। लेकिन आज हमारा रोना संसार के लिए है—धन, रिश्तों और स्वार्थ के लिए। क्या कभी हमने प्रभु के लिए आँसू बहाए? जब तक प्रार्थना शब्दों में है, वह अधूरी है; जब वह आँसुओं में बदल जाए, तभी वह सच्ची होती है।
उन्होंने भक्तों को याद दिलाया कि प्रभु को पाने के लिए विद्वान नहीं, विकल होना जरूरी है। मीरा ने रो-रोकर गिरधर को पाया, और सूरदास जी ने अंधे होकर भी प्रभु को देख लिया क्योंकि उनकी आँखों में नहीं, हृदय में आँसू थे।
नवजीत भारद्वाज जी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा; जो आँसू प्रभु के लिए गिरते हैं, वही मोती बनकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ देते हैं। प्रवचन के समापन पर नवजीत भारद्वाज जी ने सभी श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अपने हृदय को इतना निर्मल बनाइए कि प्रभु का नाम लेते ही आँखें स्वत: नम हो जाएँ। यदि आज की वाणी सुनकर आपके हृदय में थोड़ी भी हलचल हुई हो, आँखें नम हुई हों तो समझ लेना, प्रभु ने आपको छू लिया है।
इस अवसर पर श्री कंठ जज, श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा, राकेश प्रभाकर,अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ ,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा,ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,धर्मपालसिंह,नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत ,मनीष शर्मा,अवतार सैनी, परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार,दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।