जालंधर( उड़न ): पंजाब भर के करीब अढ़ाई लाख आढ़ती परिवार और उनके कर्मचारी 10 जून को पंजाब की सड़कें जाम करेंगे। पंजाब सरकार की तरफ से मूंग की दाल की सीधी खरीद करने के विरोध में उतरे आढ़तियों का आरोप है कि जिस तरह केंद्र के तीन खेती कानून मंडियों को खत्म करने वाले थे, उसी तरह पंजाब सरकार की तरफ से मूंग की दाल की खरीद सहकारी समितियों राही करने के फैसले के साथ मंडियां खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। आढ़तियों की तरफ से पहली जून से अनिश्चित समय के लिए पंजाब की मंडियों बंद की जा रही हैं।

जिक्रयोग्य है कि पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद रिवायती फसलों के अलावा मूंग की दाल, मक्का आदि की फसल भी कम से कम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) पर खरीदने का फैसला लिया है। यह खरीद मार्कफैड के लिए सहकारी समितियों की तरफ से जाएगी। यह भी जिक्रयोग्य है कि पंजाब में करीब 20 हजार टन मूंग की दाल की फसल होती है और मूंग की दाल की खरीद के लिए 35 मंडियां स्थापित की गई हैं जबकि इस बार मक्का को सरकार की तरफ से एम.एम.पी. पर खरीदने के फैसले के बाद पंजाब में मक्का की बिजवाई अधिक हो रही है। आढ़तियों को शंका है कि जिस तरह मूंग की दाल के मामले में फैसला सरकार की तरफ से लिया गया है, मक्का, बासमती और अन्य फसलों बारे भी सरकार फैसला ले सकती है। इस सम्बन्धित आढ़तियों का शिकवा था कि जब आढ़तियों ने मंडियों में करोड़ों की दुकानों खरीदी हुई हैं और लाखों रुपए उन पर खर्च किए हैं तो ऐसे में पंजाब सरकार का सीधी खरीद करने का फैसला उनको बर्बाद करने वाला होगा| आढ़तियों की तरफ से पहली जून से शुरू किए जा रहे आंदोलन में आढ़तियों के 40 हजार परिवार, एक लाख कर्मचारी और एक लाख पक्के मजदूर पंजाब सरकार के इस फैसले विरुद्ध आंदोलन शुरू कर देंगे।

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