जालन्धर :विरासत संस्था कन्या महा विद्यालय जालंधर में श्री चन्द्रमोहन( अध्यक्ष आर्य शिक्षा मंडल)
एवं उनकी सुपुत्री श्रीमती ज्योत्स्ना मोहन द्वारा विरचित “प्रताप: ए डिफायंट न्यूज़पेपर” का
लोकार्पण किया गया। इस समारोह में जस्टिस श्री एन. के सूद मुख्यातिथि के रूप में
उपस्थित हुए ।इस अवसर पर कन्या विद्यालय प्रबंधक कमेटी के माननीय सदस्यों श्रीमती
सुषमा चोपड़ा, श्री ध्रुव मित्तल, श्रीमती नीरजा चन्द्रमोहन, डॉ. सतपाल गुप्ता, श्रीमती सुशीला
भगत, श्रीमती नीरू कपूर के साथ श्री ईरवीन खन्ना, श्री राजेश बाली एवं विभिन्न
महाविद्यालयों के प्रिंसिपल, प्राध्यापकों, मीडिया जगत की सम्मानित शख्सियतों ने शिरकत
की । विद्यालय प्राचार्या प्रो. डॉ. अतिमा शर्मा द्विवेदी ने इस कार्यक्रम में उपस्थित
गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए उनके समक्ष “प्रताप: ए डिफायंट न्यूज़पेपर”'का
परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिता-पुत्री श्री चंद्रमोहन तथा श्रीमती ज्योत्स्ना मोहन के
द्वारा संयुक्त रूप से रचित यह पुस्तक वो ऐतिहासिक दस्तावेज़ है जिसमें स्वतंत्रता पूर्व
और पश्चात के भारत और उसके संघर्ष को पूरी ईमानदारी और प्रमाणिकता से प्रस्तुत किया
गया है। श्री सुरेश सेठ ने पुस्तक पर अपना रिव्यू सांझा करते हुए कहा कि यह पुस्तक
महात्मा गांधी, सरदार पटेल चंद्रशेखर, सरदार भगत सिंह जैसी महान विभूतियों और जुझारू
शख्सियतों के जीवन की घटनाओं और आज़ादी और राष्ट्र के नवनिर्माण में उनके योगदान
को नई दृष्टि से प्रस्तुत करने का सराहनीय प्रयास है । श्री सुरेश सेठ ने कहा कि यह
पुस्तक नैरेटिव नहीं अपितु उस साहस के सत्य का प्रतिपादन है जिससे सदा बाबस्ता
रहा है। उन्होंने इस सराहनीय ऐतिहासिक कार्य के लिए सुधि लेखकों के साहस और प्रयत्नों
की सराहना की। आज के इस समारोह के मुख्यातिथि महोदय श्री एन. के सूद (रिटा.जस्टिस,
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट) ने अपने संबोधन में इस ऐतिहासिक कार्य के लिए श्री चंद्रमोहन
तथा श्रीमती ज्योत्स्ना मोहन को मुबारकबाद दी। माननीय मुख्यातिथि महोदय ने कहा कि
श्री वीरेंद्र जी स्वतंत्रता संघर्ष के प्रत्यक्षदर्शी ही नहीं सहभागी भी थे अपने समय की
क्रान्तिकारी और राष्ट्रीय महत्व की विभूतियों से उनका निकट परिचय और संपर्क ही इस
पुस्तक के ऐतिहासिक समय की प्रामाणिक प्रस्तुति का आधार है।मुख्यातिथि महोदय ने कहा
कि देशभक्त लेखक की यह रचनात्मक प्रस्तुति आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगी। इस
लोकार्पण समारोह में शहर की गणमान्य शख्सियतों ने अपनी उपस्थिति से जहां इस
कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया वहीं उन्होंने इस पुस्तक के विषय में अपने मत, टिप्पणी
,प्रश्न ,जिज्ञासायें भी लेखकों के साथ सांझा कीं । श्री चंदर मोहन ने विभाजन की भयावहता,
अपने परिवार की लाहौर से जालंधर तक की यात्रा और विशेष रूप से 1980 और 90 के
दशक के दौरान पंजाब में उग्रवाद के राजनीतिक उथल-पुथल को याद किया। पुस्तक की सह-
लेखिका सुश्री ज्योत्सना मोहन, जिन्हें टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में लगभग तीन
दशकों का अनुभव है, इस प्रतिष्ठित पत्रकारिता परिवार की चौथी पीढ़ी की पत्रकार और
संपादक हैं। गौरव, प्रसन्नता और उपलब्धि की भावना से ओत-प्रोत, उन्होंने कहा कि इस
पुस्तक का पहला विमोचन पंजाब के जालंधर में किया जा रहा है, जहां पुस्तक में वर्णित
घटनाओं की श्रृंखला घटित हुई। दोनों लेखकों ने इस पुस्तक को ‘इतिहास, साहस और कहानी
कहने की यात्रा’ के रूप में परिभाषित किया, जो सत्य के लिए संघर्ष, सत्ता से सच कहने के
महत्व और सहानुभूति, सहिष्णुता व साम्प्रदायिक घृणा के विरुद्ध प्रेम जैसे मूल्यों का संदेश
देती है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मधुमीत, डीन स्टूडेंट वेलफेयर एवं अंग्रेजी विभाग की प्रमुख,
ने गरिमामयी सभा को धन्यवाद दिया और उनकी उपस्थिति को इस आयोजन के लिए
प्रेरणादायक बताया।