
श्री चैतन्य महाप्रभु जी के आविर्भाव तथा अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौडीय मठ के पूर्व आचार्य श्रील भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में 65वां वार्षिक श्री हरिनाम संकीर्तन सम्मलेन के पहले दिन की अध्यक्षता अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ के वर्तमान आचार्य त्रिदंडी स्वामी श्रीमद् भक्ति विचार विष्णु महाराज जी ने की । महाराज जी ने आज के विषय *’सत्संग की महिमा’* के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भगवान की कृपा से ही जीव को सत्संग प्राप्ति होती है और सत्संग से ही जीव को विवेक होता है कि उसको मनुष्य जन्म भगवान का भजन करने के लिए मिला है । आज के समय में श्री हरिनाम संकीर्तन करना बहुत आवश्यक है, यही साधना हमें सांसारिक सुख व आध्यात्मिक आनंद के साथ-साथ भगवान का साक्षात्कार करवाती है।
हैदराबाद से त्रिदंडी स्वामी श्रीमद् भक्ति शौध जितेंद्रिय महाराज कहा कि जीवो पर दया करना और श्री हरिनाम में रुचि रखना ही चैतन्य महाप्रभु जी के अनुसार हमारा सर्वोत्तम धर्म है ।
मायापुर से श्रीमद् भक्ति हृदय निरीह महाराज ने संकीर्तन द्वारा सभागार में उपस्थित लोगों को हरिनाम की मस्ती में नाचने के लिए मजबूर कर दिया।
वृंदावन से श्रीमद् पर्वत महाराज, कोलकाता से श्रीराम ब्रह्मचारी, अनंत राम दास, दीनबंधु प्रभु, कन्हाई प्रभु, निताई दास, ऋषिकेश प्रभु विशेष तौर से मंदिर के वार्षिक हरि नाम संकीर्तन में सम्मिलित हुए।
यहां पर नरेंद्र गुप्ता, केवल कृष्ण, अमित चड्ढा, रेवती रमन गुप्ता, राजेश शर्मा, टी एल गुप्ता, अजीत तलवाड, कपिल शर्मा ,मिंटू कश्यप,अजय अग्रवाल, राजीव ढींगरा, हेमंत थापर, सनी दुआ, प्रेम चोपड़ा, डॉ मनीष, ओम भंडारी,अजय अरोड़ा करतार सिंह, गगन अरोड़ा, विजय सग्गड़, संजीव खन्ना, कृष्ण गोपाल , जगन्नाथ, अंबरीश, गौर, नरेंद्र कालिया, दविंद्र भाखड़ी और अरुण गुप्ता उपस्थित थे