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बाढ़ के मुद्दे पर मान सरकार की गैर-जिम्मेदारी उजागर

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा का हालिया बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि पंजाब की पीड़ित जनता का अपमान भी है।

👉 मुख्यमंत्री ने पहले बाढ़ त्रासदी का मज़ाक उड़ाते हुए बकरी और मुर्गी के नुकसान पर मुआवज़ा देने की घोषणा की। अब वित्त मंत्री कह रहे हैं कि “मुआवज़े के लिए मज़बूत मैकेनिज़्म चाहिए।” सवाल यह है कि यह नीति कौन बनाएगा और कब?

👉 आप सरकार ने बाढ़ रोकथाम के लिए कोई तैयारी नहीं की। न नदियों की सफाई हुई, न तटबंध मज़बूत हुए, न कोई आपदा प्रबंधन योजना बनी – केवल झूठे दावे किए गए।

👉 ज़रूरत की घड़ी में लोगों की मदद करने की बजाय मान सरकार और उसके मंत्री सारा दोष केन्द्र पर डाल रहे हैं।

👉 पिछले तीन सालों में पंजाब के संसाधनों को फिज़ूल विज्ञापनों और मुफ्त की योजनाओं में लुटाया गया, जबकि बाढ़ रोकथाम जैसे ज़रूरी कार्यों को नज़रअंदाज़ किया गया।

👉 आज किसान अपनी फ़सल खो बैठे, मज़दूरों की रोज़ी-रोटी चली गई, आम लोगों के घर तबाह हो गए – लेकिन पंजाब सरकार अभी भी बहाने और राजनीतिक नाटक में व्यस्त है।

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