
दिल्ली: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक युग का अंत हो गया है। भारतीय मूल की दिग्गज अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने नासा से अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा कर दी है। सुनीता विलियम्स वह नाम है जिसने न केवल विज्ञान की सीमाओं को लांघा बल्कि हर भारतीय को गर्व करने के अनगिनत मौके दिए। पिछले साल महीनों तक स्पेस स्टेशन में फंसे रहने के बाद सुरक्षित वापसी कर उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति का लोहा मनवाया था।सुनीता विलियम्स का करियर उपलब्धियों की एक लंबी फेहरिस्त है। उन्होंने अंतरिक्ष में वे कारनामे किए जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेंगे। सुनीता के नाम एक महिला अंतरिक्ष यात्री के तौर पर सबसे ज्यादा बार स्पेसवॉक (9 बार) करने का रिकॉर्ड है। उन्होंने कुल 62 घंटे 6 मिनट अंतरिक्ष के खुले आसमान में चहलकदमी की। उन्होंने अपने पूरे करियर में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। यह समय उन्होंने तीन अलग-अलग मिशनों और के दौरान पूरा किया। वे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर केवल रहने ही नहीं गईं बल्कि उन्होंने वहां सैकड़ों वैज्ञानिक प्रयोगों और स्टेशन के रख-रखाव में अहम भूमिका निभाई।भले ही सुनीता विलियम्स का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका में हुआ लेकिन उनका दिल हमेशा भारतीय रहा है। उनके पिता डॉ. दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव के रहने वाले थे जो बाद में अमेरिका जाकर बस गए। सुनीता कई बार भारत और अपने गांव झूलासन आई हैं। उन्होंने अक्सर अपनी भारतीय जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों पर गर्व व्यक्त किया है।