
नई दिल्ली :ईरान ने आखिरकार इजरायल पर मिसाइलों से हमला बोल दिया। उसने दावा किया है कि इन हमलों में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के हेडक्वॉर्टर्स तबाह हो गया। ईरान ने यह भी कहा है कि उसने इस्माइल हानिया और हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत का बदला ले लिया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान ने ये हमले करके बहुत बड़ी गलती कर दी है। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। नेतन्याहू का इस मामले में अमेरिका भी साथ दे रहा है। इजरायल-ईरान के बीच दुश्मनी आज चरम पर पहुंच चुकी है, मगर कभी दोनों दोस्त हुआ करते थे। जानते हैं कि दोनों की दोस्ती और दुश्मनी की पूरी कहानी
दक्षिण एशियाई यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशन में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धनंजय त्रिपाठी के अनुसार, ईरान की दुश्मनी की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि वह यह मानने लगा है कि इजरायल के वजूद में रहने का हक नहीं है। ईरान इजरायल को छोटा शैतान तो अमेरिका को बड़ा शैतान मानता है। मध्य-पूर्व में ईरान चाहता है कि अमेरिका और इजरायल इस क्षेत्र से गायब हो जाएं।