
हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर के जैव प्रौद्योगिकी तथा बायोइन्फॉर्मेटिक्स विभागों द्वारा, एचएमवी सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तत्वावधान में, एआई-सक्षम दवा शोध और सटीक स्वास्थ्य सेवा : विज्ञान और प्रौद्योगिकी का सेतु विषय पर डीएसटी-क्यूरी प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करते हुए परिसर में एआई सप्ताह का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एचएमवी सदैव चुनौतियों को स्वीकार करने तथा नवीन तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रहा है, ताकि विकसित भारत 2027 की परिकल्पना के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार, कुशल एवं सशक्त महिला शक्ति का निर्माण किया जा सके। उन्होंने बताया कि एचएमवी सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की स्थापना का उद्देश्य विभिन्न विभागों को एक मंच पर लाकर एआई के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाना तथा इस तकनीक के माध्यम से समाज और विज्ञान के क्षेत्र में सार्थक योगदान देना है, विशेषकर तब जब महाविद्यालय वर्ष 2027 में अपने उत्कृष्टता के 100 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। इस संगोष्ठी के मुय अतिथि डॉ. सुशील मित्तल, माननीय कुलपति, इंदर कुमार गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कपूरथला थे। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा करते हुए बताया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। कार्यक्रम के मुय वक्ता डॉ. हरप्रीत सिंह, साइंटिस्ट-त्र, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ढ्ढष्टरूक्र) ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के विभिन्न अनुप्रयोगों को प्रस्तुत किया। उन्होंने हेल्थकेयर में एआई डेवलपमेंट लाइफ साइकिल, ई-संजीवनी, इंटेलिजेंट टेलीमेडिसिन सॉल्यूशंस, इंटरऑपरेबल इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स, डिजिटल बायोमार्कर्स, मॉलिक्यूलर हेल्थ मॉनिटरिंग तथा डिजिटल थैरेप्यूटिक्स आदि विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने डिजिटल हेल्थकेयर के क्षेत्र में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की भावी योजनाओं से भी अवगत कराया। दूसरे विशेषज्ञ वक्ता डॉ. अरुण खोसला, प्रोफेसर, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कयुनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग तथा प्रभारी, सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एनआईटी जालंधर ने एआई से संबंधित शब्दावली, तकनीक और उपकरणों को सरल ढंग से समझाया। उन्होंने एआई की सहायता से टाइप-ढ्ढ डायबिटीज़ और ऑटिज़्म के प्रबंधन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण केस स्टडी भी प्रस्तुत किए। तीसरे आमंत्रित वक्ता डॉ. रजनीश कुमार, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से थे। उन्होंने दवा शोध की पूरी प्रक्रिया में एआई की भूमिका तथा इस प्रक्रिया में उपयोग होने वाले विभिन्न एआई आधारित बायोइन्फॉर्मेटिक्स टूल्स की जानकारी दी। इस संगोष्ठी का प्रमुख आकर्षण सभी वक्ताओं तथा एचएमवी के विशेषज्ञों, जिनमें प्राचार्या भी शामिल थीं, के साथ आयोजित एक पैनल चर्चा रही। इसमें एआई तकनीक के विभिन्न लाभ-हानियों तथा विशेषकर जीवन विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए एआई और बायोइन्फॉर्मेटिक्स के क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। सभी सत्रों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम के अंतर्गत इसी विषय पर पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें 30 विद्यार्थियों ने भाग लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा प्रस्तुत की। इस प्रतियोगिता में एलपीयू की शोधार्थी सुश्री आयुषी गौतम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि बी.एससी. मेडिकल (बायोइन्फॉर्मेटिक्स) सेमेस्टर-6 की छात्रा लावण्या ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। तृतीय स्थान जैस्मिन शर्मा (बी.एससी. बायोटेक्नोलॉजी सेमेस्टर-2) तथा मर्सी घरू (एम.एससी. बायोइन्फॉर्मेटिक्स सेमेस्टर-2) ने संयुक्त रूप से प्राप्त किया। प्राचार्या डॉ. एकता खोसला तथा डीन अकादमिक्स डॉ. सीमा मरवाहा ने इस सफल आयोजन के लिए संयोजक डॉ. हरप्रीत सिंह, सह-संयोजक डॉ. जितेंद्र कुमार, मि. सुमित शर्मा, मिसेज पूर्णिमा शर्मा, डॉ. श्वेता शर्मा, मिसेज रमा शर्मा, मि. आशीष चड्ढा, डॉ. शुचि शर्मा, मि. अरविंद चंडी तथा पूरी टीम को हार्दिक बधाई दी। इस अवसर पर विज्ञान एवं कंप्यूटर विज्ञान संकाय के अनेक प्राध्यापक भी उपस्थित रहे, जिनमें मिसेज दीप्तिशिखा (विभागाध्यक्ष, रसायन), डॉ. संगीता अरोड़ा (विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस) तथा डॉ. सलोनी शर्मा (विभागाध्यक्ष, भौतिकी) प्रमुख रूप से शामिल थे। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. अंजना भाटिया, कोऑर्डिनेटर आईक्यूएसी तथा डीन रिसर्च एंड इनोवेशन ने किया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं को प्रेरित और उत्साहित बनाए रखा।