
जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनि जयंती के शुभ अवसर पर आलौकिक दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमानो से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम में आयोजित शनि जयंती के पावन अवसर पर दिव्य हवन यज्ञ, वैदिक मंत्रोच्चारण और प्रभु भक्ति के मधुर वातावरण ने पूरे धाम को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया। भक्तजन श्रद्धा और भक्ति में लीन होकर शनिदेव की आराधना में भाव-विभोर दिखाई दिए। इस पावन अवसर पर धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को शनि जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शनि जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, कर्मों की पवित्रता और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य अवसर है।
उन्होंने कहा कि भगवान शनिदेव को लोग प्रायः भय और दंड के देवता के रूप में देखते हैं, जबकि वास्तव में वे न्याय, अनुशासन और कर्मफल के देवता हैं। जिस प्रकार स्वर्ण को अग्नि में तपाकर कुंदन बनाया जाता है, उसी प्रकार शनिदेव मनुष्य को कठिन परिस्थितियों से गुजारकर उसके भीतर धैर्य, सहनशीलता, सत्य और आत्मबल का निर्माण करते हैं। शनि कभी किसी का अहित नहीं करते, बल्कि मनुष्य को उसके कर्मों का सच्चा बोध कराकर उसे श्रेष्ठ जीवन की ओर अग्रसर करते हैं।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि भगवान शनिदेव की दृष्टि से न कोई राजा बड़ा होता है और न कोई गरीब छोटा। उनके न्याय के सामने सभी समान हैं। राजा विक्रमादित्य की कथा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जब राजा को अपने वैभव और शक्ति का अभिमान हुआ, तब शनिदेव ने उन्हें कठिन परीक्षाओं से गुजरने पर विवश किया। राजपाट छिन गया, अपमान सहना पड़ा, लेकिन उन्होंने सत्य, धैर्य और विनम्रता का साथ नहीं छोड़ा। अंततः शनिदेव की कृपा से उन्हें पहले से भी अधिक सम्मान और वैभव प्राप्त हुआ। यह कथा स्पष्ट करती है कि शनिदेव विनाश नहीं करते, बल्कि मनुष्य की परीक्षा लेकर उसे और अधिक परिपक्व बनाते हैं।
उन्होंने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि जब रावण अहंकार में इतना अंधा हो गया कि उसने ग्रहों तक को बंदी बना लिया, तब शनिदेव ने समय आने पर उसके विनाश में अपनी भूमिका निभाई। यह घटना हमें सिखाती है कि अन्याय, अत्याचार और अहंकार चाहे कुछ समय के लिए कितना भी शक्तिशाली प्रतीत हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
नवजीत भारद्वाज जी ने श्रद्धालुओं को समझाया कि शनिदेव की कृपा पाने के लिए बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि सच्चे और पवित्र कर्म आवश्यक हैं। जो व्यक्ति गरीब और जरूरतमंद की सहायता करता है, बुजुर्गों का सम्मान करता है, मजदूर और असहाय का हक नहीं मारता, सत्य बोलता है और ईमानदारी से जीवन व्यतीत करता है, उस पर शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य मंदिरों में तेल तो चढ़ाता है, लेकिन यदि उसके व्यवहार में छल, कपट, अहंकार और स्वार्थ भरा है, तो उसकी पूजा अधूरी रह जाती है। शनिदेव हमें यही संदेश देते हैं कि सबसे बड़ा उपाय अपने कर्मों को सुधारना है। क्योंकि शनिदेव शब्दों से नहीं, बल्कि मनुष्य के कर्मों से प्रसन्न होते हैं।
प्रवचनों के अंत में नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि जीवन में आने वाला कठिन समय वास्तव में ईश्वर की एक परीक्षा होती है। व्यापार में हानि, अपनों का साथ छोड़ देना, अथक मेहनत के बाद भी सफलता में विलंब — ये सब परिस्थितियां मनुष्य को भीतर से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाती हैं। जिस प्रकार बीज मिट्टी के अंधकार में दबकर ही विशाल वृक्ष बनता है, उसी प्रकार संघर्ष मनुष्य को महान बनाता है।
उन्होंने कहा कि शनि जयंती का वास्तविक संदेश यही है कि मनुष्य अपने जीवन में सत्य, न्याय, सेवा, करुणा और विनम्रता को अपनाए। किसी का दिल न दुखाए, किसी के अधिकार का हनन न करे और अपने कर्मों को पवित्र बनाए। क्योंकि भगवान शनिदेव देर अवश्य करते हैं, लेकिन न्याय अवश्य करते हैं।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा,सरोज बाला, समीर कपूर,मोनिका कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,मयंक कपूर,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,नरेश,कोमल, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह, धर्मपालसिंह, अमरजीत सिंह, उदय , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,सुक्खा अमनदीप,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, अजय कुमार सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।