प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार, राष्ट्रीय समन्वयक (कॉलेज)डी.ए.वी,सी.एम.सी. के नेतृत्व में डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर में विश्व दर्शन दिवस के उपलक्ष्य में 16 मार्च 2026 को “आलोचनात्मक चिंतन और दार्शनिक मनन” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन स्नातकोत्तर गणित विभाग तथा दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के वित्तीय सहयोग से प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक तिलक-अनुष्ठान, दीप-प्रज्वलन तथा डी.ए.वी. गान के सामूहिक गायन के साथ हुआ। प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार, वरिष्ठ उप-प्राचार्य डॉ. कुॅंवर राजीव तथा प्रो. सोनिका दानिया ने सभी आमंत्रित वक्ताओं का हरित स्वागत किया। अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. अनूप कुमार ने विद्यार्थियों में नैतिक चेतना, बौद्धिक स्पष्टता तथा विश्लेषणात्मक दृष्टि के विकास में दर्शनशास्त्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता डॉ. सतीश कपूर ने अपने व्याख्यान में शैक्षणिक जीवन तथा उत्तरदायी निर्णय-निर्माण में आलोचनात्मक चिंतन के महत्त्व को रेखांकित किया। द्वितीय सत्र में श्री कंवरप्रीत सिंह ने तार्किक तर्कशक्ति को सुदृढ़ करने में दार्शनिक मनन की भूमिका पर विचार प्रस्तुत किए तथा यह स्पष्ट किया कि यह दैनिक जीवन में किस प्रकार सार्थक सिद्ध होता है। डॉ. आदित्य के. गुप्ता ने अपने संबोधन में उच्च शिक्षा में प्रश्नाकुलता और संवाद की संस्कृति के महत्त्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने प्राचीन भारतीय साहित्य से प्रासंगिक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए समग्र तर्कशीलता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री जे. सी. जोशी ने स्वतंत्र एवं चिंतनशील विचारधारा की दार्शनिक आधारभूमि पर अपने गहन विचार सांझा किए।

इस संगोष्ठी का आयोजन और समन्वय मेज़बान विभागों के संकाय सदस्यों द्वारा अत्यंत दक्षता और सूक्ष्मता के साथ किया गया। गणित विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष अरोड़ा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए संगोष्ठी की शैक्षणिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. रंजीता गुगलानी ने विषय-वस्तु का परिचय दिया तथा दिवस भर की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। दर्शनशास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ. दिनेश अरोड़ा ने संगोष्ठी के समग्र समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. सीमा शर्मा ने स्वागत-संबंधी व्यवस्थाओं की देखरेख की, जबकि डॉ. आशु बहल ने सुश्री प्रेरणा के सहयोग से पंजीकरण प्रक्रिया का संचालन किया। आतिथ्य-संबंधी व्यवस्थाओं का दायित्व प्रो. साहिल नागपाल ने डॉ. ईशा के सहयोग से संभाला, जबकि प्रो. जसमीन कौर ने मंच-संचालन का दायित्व कुशलतापूर्वक निभाया।

इस संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों—डॉ. एस. के. खुराना, डॉ. निश्चय बहल, डॉ. कोमल अरोड़ा, डॉ. नवीन सूद, डॉ. मनोज, प्रो. पंकज गुप्ता, डॉ. शरणजीत, प्रो. रितु तलवार, डॉ. राजन शर्मा, डॉ. ललित गोयल, प्रो. श्वेता, डॉ. एकजोत कौर, डॉ. बलविंदर सिंह तथा डॉ. सरुचि—के साथ-साथ विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

समापन सत्र में गणमान्य अतिथियों द्वारा “वास्तविक जीवन में दर्शन” विषय पर आधारित फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दिनेश अरोड़ा ने प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों तथा भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषूद के सहयोग के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक छायाचित्र तथा दोपहर के भोजन के साथ हुआ। यह आयोजन विश्व दर्शन दिवस का एक सार्थक, प्रेरणादायक और बौद्धिक रूप से समृद्ध उत्सव सिद्ध हुआ।