
जालंधर, 12 अप्रैल:
धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता के प्रतीक बैसाखी पर्व के पावन अवसर पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, नुरमहल आश्रम में एक विशाल आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की तथा बैसाखी पर्व की शुभता का लाभ प्राप्त किया।
समागम के दौरान मंच से उपस्थित वक्ताओं ने बैसाखी पर्व के आध्यात्मिक, ऐतिहासिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि बैसाखी केवल फसल कटाई का उत्सव नहीं, बल्कि यह नवचेतना, समर्पण, साहस और धर्म की रक्षा का भी संदेश देती है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की जीवंतता तथा सामूहिक सद्भाव का प्रतीक है।
इस अवसर पर स्वामी गुरुकिरपानंद जी, शूरवीर सिंह एवं साध्वी सुमेधा भारती जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने बैसाखी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व हमें आत्मिक उन्नति, सेवा, समर्पण और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने संगत को अपने जीवन में गुरु की शिक्षाओं को अपनाने तथा समाजहित में निरंतर योगदान देने का संदेश दिया।
वक्ताओं ने कहा कि बैसाखी का पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि सच्ची समृद्धि केवल बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि भीतर की जागृति, आत्मबल और ईश्वर से जुड़ाव में निहित है। जब मनुष्य आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सार्थक बनता है।
समागम के दौरान वातावरण भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से ओत-प्रोत रहा। उपस्थित संगत ने भजन, प्रवचन एवं आध्यात्मिक विचारों का रसास्वादन किया और बैसाखी पर्व की पावन भावना को आत्मसात किया।