
दिल्ली; मीडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहां इसकी तपिश केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झुलसाने लगी है। ईरान और इज़रायल के बीच छिड़ी इस जंग के 21वें दिन एक ऐसी घटना घटी है जिसने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में हड़कंप मचा दिया है। दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा केंद्रों में शुमार कतर के रस लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर भीषण मिसाइल हमला हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है।कतर का रस लाफान शहर दुनिया भर में LNG निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। इस हमले ने न केवल इस औद्योगिक शहर को खंडहर में तब्दील करने की कोशिश की है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी सीधा प्रहार किया है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, इस हमले के बाद से इस हब की निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट मामूली नहीं है, क्योंकि यूरोप से लेकर एशिया तक के देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी केंद्र पर निर्भर हैं।कतर के ऊर्जा मंत्री और कतर एनर्जी के प्रमुख, महामहिम साद शेरिदा अल-काबी ने इस तबाही की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए बताया कि मिसाइल हमलों ने उत्पादन सुविधाओं को व्यापक क्षति पहुंचाई है। उनके आकलन के अनुसार, इस हमले के कारण कतर को सालाना लगभग 20 अरब डॉलर के राजस्व का घाटा उठाना पड़ेगा।सबसे चिंताजनक पहलू इस बुनियादी ढांचे की मरम्मत का समय है। विशेषज्ञों और Qatar Energy का अनुमान है कि क्षतिग्रस्त संयंत्रों को फिर से पूरी क्षमता से चालू करने में कम से कम 5 साल का समय लग सकता है। इतनी लंबी अवधि तक उत्पादन बाधित रहने का मतलब है कि दुनिया को आने वाले कई सालों तक गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।