
भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं पूर्व आईएएस अधिकारी श्री एस. आर. लधर ने कहा है कि Manjinder Singh Lalpura को चार वर्ष की सजा होने के बावजूद विधायक पद से अयोग्य घोषित न किया जाना संविधान और कानून का खुला उल्लंघन है।
श्री लधर ने कहा कि Representation of the People Act, 1951 तथा सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय Lily Thomas v. Union of India के अनुसार यदि किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सजा पर रोक पर्याप्त नहीं होती, बल्कि दोषसिद्धि (conviction) पर रोक आवश्यक होती है। यदि दोषसिद्धि पर कोई रोक नहीं है, तो विधायक का पद पर बने रहना पूरी तरह अवैध है।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब एक साधारण सरकारी कर्मचारी को 48 घंटे की हिरासत के बाद निलंबित कर दिया जाता है, तो एक विधायक, जिसे अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है, वह किस आधार पर पद पर बना हुआ है? यह दोहरे मानदंड (double standards) का स्पष्ट उदाहरण है।
श्री लधर ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे की विश्वसनीयता का प्रश्न है। यदि कानून अपने आप लागू होता है, तो फिर इस मामले में देरी क्यों की जा रही है? क्या विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) कानून से ऊपर हैं, या उन पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव है?
पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष से मांग की कि वे तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए संबंधित विधायक को अयोग्य घोषित करें और संविधान की गरिमा को बनाए रखें।
आम आदमी पार्टी ने देश के सविधान और देश की सुप्रीम कोर्ट को टिच समज रखा है।
एजेहे केसों में सख़्त सजा का प्रावधान होना चाहिए ता जो उदाहरण तह हो के देश का कानून किसी की रखैल न्ही है।
अंत में श्री लधर ने कहा कि यदि दोषसिद्धि के बावजूद जनप्रतिनिधि पद पर बने रहते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत है और इससे जनता का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच जोरदार तरीके से उठाएगी।