
चंडीगढ़, 6 मार्च 2026
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने कहा कि 8 मार्च को नया बजट पेश करने से पहले आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार को पिछले वर्ष के बजट में किए गए वादों और घोषणाओं का पूरा हिसाब पंजाब की जनता के सामने रखना चाहिए। चुग ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार हर साल अपने बजट में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले साल घोषित अधिकांश बड़े प्रोजेक्ट आज तक धरातल पर दिखाई ही नहीं देते।
चुग ने कहा कि मान सरकार ने राज्य में नशे से पीड़ित लोगों का वास्तविक आंकड़ा जुटाने के लिए Rs. 150 करोड़ की लागत से ड्रग सेंसस कराने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक इस योजना पर एक रुपये का भी खर्च नहीं हुआ। इसी तरह पूरे राज्य में 3000 इंडोर जिम स्थापित करने और 13 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को अपग्रेड करने की घोषणाएं भी केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं, जिससे बजट में घोषित राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
चुग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अमृतसर में ‘पीएम एकता मॉल’ के निर्माण के लिए Rs. 159 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई थी और राज्य सरकार ने भी इस परियोजना के लिए अतिरिक्त धन खर्च करने का दावा किया था। लेकिन आज तक इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन तक तय नहीं हो सकी है। चुग ने कहा कि नंगल को इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने, डेरा बस्सी, खन्ना और पातरां में नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने तथा विभिन्न जिलों में टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर स्थापित करने जैसी घोषणाएं भी अब तक अधूरी पड़ी हैं।
चुग ने कहा कि गांवों में 2.5 लाख स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए Rs. 115 करोड़ का प्रावधान किया गया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कई गांवों और कस्बों में अंधेरा ही अंधेरा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2022 के चुनावों में आम आदमी पार्टी ने किसानों को सभी फसलों पर एमएसपी देने का वादा किया था, लेकिन आज तक किसी भी राज्य बजट में इसके लिए एक रुपये का भी प्रावधान नहीं किया गया।
महिलाओं को Rs. 1000 प्रति माह देने की संभावित योजना पर चुग ने कहा कि यदि यह घोषणा की जाती है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इस योजना को लागू करने में चार साल क्यों लग गए। चुग ने सवाल उठाया कि क्या मान सरकार उन 48 महीनों का बकाया भी पंजाब की महिलाओं को देगी, जिनके लिए यह वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि नया बजट पेश करने से पहले पंजाब की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि पिछले बजट में घोषित योजनाओं और आवंटित करोड़ों रुपये का आखिर क्या हुआ।