4 मार्च 2026
थीम: “सिस्टम बदलें, सेहतमंद जीवन जियें (Changing Systems, Healthier Lives)”
हर वर्ष 4 मार्च को विश्व स्तर पर वर्ल्ड ओबेसिटी डे मनाया जाता है। यह दिन दुनिया में मोटापे (Obesity) के फैलाव, उसकी वजहों, प्रभावों और उससे निपटने के रास्तों पर ध्यान केंद्रित करने का एक अवसर है। 2026 की थीम — “सिस्टम बदलें, सेहतमंद जीवन जियें” — हमें यह याद दिलाती है कि केवल व्यक्तिगत प्रयास ही नहीं बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और सरकारी प्रणालियों में बदलाव आना आवश्यक है ताकि हम मोटापे को रोक सकें और एक स्वस्थ जीवन सुनिश्चित कर सकें।
भारत जैसे देश में, जहाँ आधा आबादी युवा है और हर तीसरा बच्चा अब मोटापे की समस्या से ग्रस्त है, यह विषय और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। खासकर बच्चों में मोटापा — जिसे हम अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में मानते हैं — भविष्य में मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मानसिक तनाव और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बन सकता है।
मोटापा: एक बढ़ती समस्या
मोटापा तब होता है जब शरीर में अत्यधिक वसा जमा हो जाती है, जिससे वजन सामान्य से अधिक हो जाता है। बच्चों के मामले में यह स्थिति उनके बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के हिसाब से तय की जाती है। जब किसी बच्चे का BMI उसकी उम्र और लिंग के हिसाब से 95वें पर्सेंटाइल से ऊपर होता है, तो उसे मोटापा माना जाता है।
आज भारत में बच्चों में मोटापे की दर तेजी से बढ़ रही है। शहरी इलाकों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है, लेकिन अब गाँवों में भी यह चिंता का विषय बन चुकी है। भारत केवल खाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने की समस्या से जूझ रहा था—आज वही देश अत्यधिक कैलोरी और पोषणहीन आहार के कारण स्वास्थ्य संकट में है।
कारण: क्यों बढ़ रहा है बच्चों में मोटापा?
1. गलत खान-पान की आदतें
• बाजार में उपलब्ध मिठाई, �