
स्वामी संत दास पब्लिक स्कूल जालंधर ने 7 अप्रैल 2026 को छठी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ‘वर्क इन ह्यूमन सर्विसेज’ डोमेन के अंतर्गत कौशल बोध पुस्तक से “बिना आग के पकवान (Cooking Without Fire)” विषय पर एक रोचक एवं नवाचारी सीबीएसई व्यावसायिक शिक्षा गतिविधि का सफल आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में कौशल-आधारित अधिगम, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था, जो सीबीएसई-एनईपी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसमें रटने की शिक्षा से हटकर समग्र एवं कौशल-आधारित शिक्षा पर बल दिया गया है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मे अंशमीत सिंह,मास्टर शेफ इंडिया सीजन 9 (टॉप 4 फाइनलिस्ट) उपस्थित रहे, जिनका विद्यालय के आदरणीय अध्यक्ष स्वामी शांतानंद जी महाराज द्वारा हार्दिक स्वागत किया गया। मास्टरशेफ अंशमीत सिंह की उपस्थिति ने कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। उनकी प्रेरणादायक यात्रा और पाक-कला कौशल ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को अत्यंत प्रभावित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसके पश्चात आज के समय में कौशल शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। व्यावहारिक शिक्षा और वास्तविक जीवन से जुड़ाव के महत्व को रेखांकित करते हुए यह बताया गया कि “बिना आग के पकवान” जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में रचनात्मकता, टीमवर्क और आत्मविश्वास को विकसित करती हैं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण श्री अंशमीत सिंह द्वारा प्रस्तुत लाइव डेमोंस्ट्रेशन रहा, जिसमें उन्होंने बिना आग के बनाए जाने वाले विभिन्न पौष्टिक एवं आकर्षक व्यंजन जैसे मैंगो योगर्ट पार्फे, क्रीम चीज़ एवं एवोकाडो वेजी सैंडविच रोल्स तथा चॉकलेट बनाना एनर्जी बाइट्स तैयार करके दिखाए। उनकी तकनीक, प्रस्तुति शैली और रचनात्मकता ने सभी को प्रभावित किया। विद्यार्थियों ने बड़े ध्यान से अवलोकन किया और स्वास्थ्यवर्धक एवं रचनात्मक पाक-कला के महत्वपूर्ण गुर सीखे।
जिज्ञासु विद्यार्थियों ने घर पर स्वस्थ तरीके से भोजन बनाने से संबंधित प्रश्न भी पूछे। कार्यक्रम का समापन विद्यालय की माननीय प्राचार्या डॉ. सोनिया मागो द्वारा मुख्य अतिथि के सम्मान समारोह के साथ हुआ, जिसमें उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ “करके सीखने” (Learning by Doing) की भावना को साकार करती हैं और विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता एवं रचनात्मकता का विकास करती हैं।
समग्र रूप से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा, जिसने विद्यार्थियों पर गहरा प्रभाव छोड़ा और कौशल-आधारित शिक्षा के महत्व को और अधिक सुदृढ़ किया।