चंडीगढ़, 9 मार्च
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब की आप सरकार पर पंजाब राज्य बिजली निगम (PSPCL) को आर्थिक रूप से दिवालिया करने की साजिश का आरोप लगाया है।

आज यहां इस विषय पर बुलाई गई एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जाखड़ ने तथ्यों के आधार पर बताया कि किस तरह सरकार कागज़ों में ही बिजली निगम को घाटे से मुनाफे में दिखाकर पंजाब के लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि वास्तव में सरकार राज्य की जीवनरेखा माने जाने वाले इस निगम को आर्थिक रूप से कमजोर करके उसे निजीकरण की ओर धकेलने की कोशिश कर रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 28 नवंबर 2025 को पंजाब राज्य बिजली निगम ने पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग के पास अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) याचिका दाखिल की थी, जिसे नियमों के अनुसार हर साल 30 नवंबर से पहले दाखिल करना होता है। इस याचिका में निगम ने 1715 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था।

लेकिन 4 फरवरी 2026 को पहली बार बिजली निगम ने एक संशोधित याचिका (रिविजन पिटीशन) दाखिल की, जिसे हैरानीजनक ढंग से नियामक आयोग ने स्वीकार भी कर लिया। इस संशोधित याचिका में निगम ने दावा किया कि अब वह 7852 करोड़ रुपये के अधिशेष (सरप्लस) में है और उसे 19,600 करोड़ रुपये की जगह केवल 15,200 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी की जरूरत होगी।

इसके अलावा सरकार द्वारा दी गई 3581.95 करोड़ रुपये की लॉस फंडिंग को भी नियमों के खिलाफ जाकर निगम ने अपनी वित्तीय पुस्तकों में आय के रूप में दिखाया, जो पूरी तरह गलत है।

जाखड़ ने कहा कि इसी संशोधित याचिका के आधार पर बिजली दरों में कमी का दिखावा किया गया है, जबकि वास्तव में यह लोगों को गुमराह करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा कमी 300 यूनिट तक की घरेलू खपत में दिखाई गई है, जबकि इतनी बिजली तो पहले ही मुफ्त मिलती है। इसका मतलब है कि इस कमी का लाभ जनता को नहीं मिलेगा, बल्कि सरकार को बिजली निगम को दी जाने वाली सब्सिडी कम देनी पड़ेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह बिजली निगम चल पाएगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी तरीके से वास्तविक लागत और खर्च को कम करके नहीं दिखाया जा सकता। उन्होंने बताया कि बिजली निगम की हालत बेहद चिंताजनक है और सरकार पर 31 मार्च 2025 तक की 11,109.70 करोड़ रुपये की सब्सिडी बकाया है। इसी तरह 31 दिसंबर 2025 तक चालू वित्त वर्ष के 4300 करोड़ रुपये और सरकारी विभागों के 2600 करोड़ रुपये भी बकाया हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कागज़ों में हेरफेर करके बिजली निगम को एक साजिश के तहत बड़े घाटे की ओर धकेला जा रहा है, ताकि अंततः उसे एक असफल संस्थान बनाकर निजीकरण की राह पर ले जाया जा सके।

जाखड़ ने यह भी कहा कि पंजाब राज्य बिजली निगम में नियमित चेयरमैन की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि यदि अस्थायी प्रशासक भी नियुक्त करना हो तो वह प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी होना चाहिए, लेकिन सरकार ने इस नियम का भी पालन नहीं किया। जिस अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है, उसके पास पहले से कई विभागों का कार्यभार है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तव में बिजली निगम को दिल्ली से आए लोग अपने तरीके से चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका उदाहरण यह है कि जब बिजली दरों में कमी की घोषणा की गई, तब श्री हरिमंदिर साहिब और दुर्गियाना मंदिर की बिजली दरों में केवल 31 पैसे प्रति यूनिट की ही कमी की गई, जबकि पंजाब का कोई भी व्यक्ति यदि निर्णय लेने की स्थिति में होता तो ऐसा कभी नहीं करता।

जाखड़ ने कहा कि इस पूरी योजना के तहत कागज़ों में सरकार द्वारा बिजली निगम को दी जाने वाली सब्सिडी को कम दिखाकर बजट से पहले लोगों को भ्रमित किया जा रहा है, ताकि बजट में इस पैसे को अन्य योजनाओं पर खर्च करने का दावा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि सरकार पंजाब के एक प्रतिष्ठित संस्थान के अस्तित्व को दांव पर लगाकर मुफ्त योजनाएं चलाने की कोशिश कर रही है, जो किसी भी तरह समझदारी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के कागज़ी खेल से यह वित्तीय वर्ष निकल भी जाता है, तो अगले वित्तीय वर्ष में इसका बोझ अंततः पंजाब के आम लोगों पर ही पड़ेगा।