जालंधर: भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 (2)(b) में यह स्पष्ट हिन्दू includes बौद्ध, जैन और सिख l इससे यह तो साफ है बौद्ध, जैन और सिख तो धर्म मान लिये गये परंतु हिन्दू क्या उसकी व्याख्या नहीं की गयी l

सवाल यह उठता है हिन्दू क्या है? अभी एक शंकराचार्य के उपर सवाल उठा दिये, मुझे अहसास है सिख एक धर्म है क्योंकि इसके पास एक विचार है , उसके धार्मिक , सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक एक ढांचा है , उसकी रहित मर्यादा है उसका आधार गुरू ग्रंथ है , 200 वर्ष के उपर का इतिहास सत्य ही ईश्वर परंतु उस सत्य का आचरण उस सत्य से भी उपर , उसका वैज्ञानिक स्वभाव भी जिसको संविधान के अनुच्छेद 51 (A) में बताया गया l

हिन्दू का यह भी पता नहीं किस आधार पर इसको मान्यता मिली , गत दिनों में माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने रामायण और महाभारत को किस्से कहानियां तस्लीम कर लिया l अभी जो शंकराचार्य और उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री के बीच ठनी है उसका क्या आयाम होगा कहा नहीं जा सकता l लगता यह भी वैदिक काल की बात की जाती है जो वरण व्यवस्था है यदि मनु स्मृति को ही समझने का प्रयास करें तो अनेकों विसंगति से भरा है , जिसे सनातन बताया जा रहा है उसका अक्स मन्दिरों से परिलक्षित होता है l यही बात गुरू नानक ने हिन्दू की व्याख्या करते हुए हिन्दू वह जो जाति के बिना सम्भव नहीं और मूर्ति पूजा l

हिन्दू अथवा सनातन ने वेद के सूत्र जन्मना जायते शूद्र: परंतु वास्तविकता इससे कोसों दूर तभी तो बौद्ध, जैन और सिख जिनका जातिवाद और मूर्ति पूजा से कोई लेना देना तो फिर इनको हिन्दू में कैसे समाहित किया जा सकता है l मैं क्योंकि सिख हूँ इसलिये सिख के बारे में स्पष्ट है कि गुरू नानक से गुरू गोबिंद राय व्यक्ति गुरू परंतु गुरू गोबिंद सिंह ने व्यक्ति गुरू के स्थान पर पंचायत की स्थापना कर दी जो पाखंड, जातिवाद, शोषण, नशा और भय से मुक्त जिसका आधार दया , समाज के प्रति कर्तव्य (धर्म), दया और धर्म को पूरा करने के लिये हिम्मत, उसके लिये संघर्ष तभी ही वह पंचायत खालसा और साहिबी भी तो इसे हिन्दू में कैसे समाहित किया जा सकता है ? इसलिए हिन्दू जिसका कोई आधार नहीं, जातिवाद के आधार पर तिलक जनेऊ का अधिकारी ब्राह्मण, क्षत्रीय और वैश्य, उसी को अधिकार मन्दिर का भी तो जिसे मनुस्मृति ने शुद्र बताया क्या उसी का शोषण l तो कैसे वह बहुसंख्यक l यही कारण था गुरू नानक ने उस शोषित को समझा और उसे मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया , गुरू नानक को ईश्वर उसी शोषित में क्योंकि श्रम शक्ति का वही तो प्रतीक l

उपरोक्त कुछ बातें आपके सम्मुख ताकि इस पर चर्चा हो , केवल आस्था का नाम लेकर भ्रम भ्रांतियों का पूरा देश शिकार हो जाये , क्योंकि मुद्धा उछाल दिया जा रहा है हिन्दू राष्ट्र का , तो यह तो स्पष्ट हो वह राष्ट्र कैसा होगा ?