जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान नम्रता एवं बलविंदर कुमार से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन-यज्ञ के पावन अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने माँ की महिमा का अत्यंत भावुक और हृदयस्पर्शी वर्णन किया। उन्होंने माँ के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा
*‘‘मां दी छांव जही रीस ना कोई, इस तो वड्डी सीस ना कोई,*
*लग्गन ना लोको गर्म हवावां कदे किसे दिया मावां नू…’’*
उन्होंने कहा कि ये केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि हर उस दिल की सिसकती हुई आवाज हैं, जिसने माँ के स्नेह, त्याग और ममता को महसूस किया है। यह एक ऐसी पुकार है, एक ऐसी दुआ है जो हर बच्चे के दिल से अपनी माँ के लिए निकलती है।
नवजीत भारद्वाज जी ने अत्यंत भावुकता के साथ कहा कि माँ कोई साधारण शब्द नहीं, बल्कि एक गहरा एहसास है। माँ स्वयं चाहे कितनी ही कठिन परिस्थितियों में क्यों न हो, वह अपने बच्चों के चेहरे पर कभी दुख की लकीर नहीं आने देती। वह अंदर से टूटती रहती है, लेकिन अपने बच्चों को हमेशा मजबूत बनाती है।
उन्होंने आगे कहा कि बचपन में जब हम गिरते हैं, रोते हैं, तो सबसे पहले माँ ही दौडक़र आती है। और जब हम बड़े हो जाते हैं, तब भी बिना कहे ही माँ हमारे हर दर्द को समझ लेती है। वह हमारे चेहरे को पढ़ लेती है, हमारी खामोशी को सुन लेती है, और हमारे दुखों को अपने भीतर समेट लेती है।
उन्होंने ‘‘गर्म हवाओं’’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि ये जीवन की कठिनाइयाँ, परेशानियाँ और दुख हैं, जो इंसान को भीतर तक झुलसा देते हैं। लेकिन इन सबसे अधिक चिंता अगर किसी को होती है, तो वह माँ होती है। माँ हर रात अपने बच्चों के लिए जागती है, हर पल प्रार्थना करती है, ‘‘हे प्रभु, मेरे बच्चों को हर बुरी नजर से बचाना, अगर कोई दुख देना हो तो मुझे दे देना, पर मेरे बच्चों को हमेशा मुस्कुराते रखना।’’
उन्होंने सवाल उठाया, जो माँ अपनी हर खुशी, हर सपना और हर आराम अपने बच्चों के लिए कुर्बान कर देती है, क्या वह कभी दुख की हकदार हो सकती है? जिसने हमें चलना, गिरकर उठना और जीवन जीना सिखाया, क्या उसे कभी पीड़ा मिलनी चाहिए?
उन्होंने कहा कि जब माँ रोती है, तो केवल उसकी आँखों से आँसू नहीं गिरते, बल्कि पूरा घर सूना हो जाता है। और जब माँ मुस्कुराती है, तो ऐसा लगता है मानो उस घर में स्वयं भगवान का वास हो गया हो।
माँ का प्रेम निस्वार्थ होता है, बिना किसी शर्त के होता है। वह कभी कुछ नहीं मांगती, बस अपने बच्चों की खुशियाँ चाहती है। इसलिए यह दिल से निकली सच्ची दुआ है कि ना किसी माँ की आँखों में आँसू आएं, ना किसी माँ का दिल टूटे, और कोई भी दुख उसे छू भी न सके।
प्रवचन के अंत में नवजीत भारद्वाज जी ने सभी से हाथ जोडक़र प्रार्थना करने का आग्रह किया, हे प्रभु, दुनिया की हर माँ को सलामत रखना, उनकी झोली खुशियों से भर देना, और उन्हें कभी भी दुख की इन गर्म हवाओं का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि यदि माँ सुरक्षित और खुश है, तो वास्तव में पूरी दुनिया खूबसूरत है। क्योंकि माँ सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि इस दुनिया की सबसे बड़ी नेमत और सबसे पवित्र आशीर्वाद है।
हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत ,जोगिंदर सिंह, मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,नरेश,दिक्षित, अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।