
दिल्ली; भारत सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब आधिकारिक उत्सवों पर इस गीत के पूरे छह छंदों वाला संस्करण ही प्रस्तुत किया जाएगा। इस पूरे गायन या वादन के लिए 3 मिनट 10 सेकंड का समय तय किया गया है।यह नया प्रोटोकॉल तिरंगा फहराते समय और देश के राष्ट्रपति से जुड़े कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से लागू होगा। राष्ट्रपति के आगमन पर, उनके भाषण की शुरुआत और समापन के समय इसी निर्धारित अवधि के साथ गीत बजाया जाएगा। यही नियम राज्यों के राज्यपालों के लिए भी तय किया गया है। उनके सरकारी कार्यक्रमों और संबोधनों के दौरान भी इसी संस्करण का पालन करना होगा।प्रशासन का मानना है कि इस कदम से राष्ट्रीय गीत के मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी। अलग-अलग कार्यक्रमों में होने वाली प्रस्तुतियों में एकरूपता लाने के लिए यह समय सीमा और छंदों की संख्या तय की गई है। अब सभी सरकारी आयोजनों में इसी तय मानक के अनुसार वंदे मातरम् की गूंज सुनाई देगी। वंदे मातरम् मूलतः बंगाल के लिए लिखा गया गीत था। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में बंगदर्शन पत्रिका में प्रकाशित किया और बाद में नॉवेल आनंदमठ में शामिल किया। यह गीत मातृभूमि के लिए सम्मान और प्रेम की अभिव्यक्ति है, जो स्वतंत्रता संग्राम के समय छात्रों और सैनिकों में विशेष रूप से गाया जाता था।