
दिल्ली: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है, जिससे निवेशकों और शेयर बाजार दोनों पर दबाव देखा जा रहा है। मंगलवार को रुपया 91 रुपये के नीचे गया था, लेकिन बुधवार को मामूली सुधार देखने को मिला। इस बीच, मार्केट एक्सपर्ट और “Sense and Simplicity” के फाउंडर सुनील सुब्रमण्यम ने कहा कि रुपये की गिरावट कोई कमजोरी नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। उनका मानना है कि रुपये का सही लेवल 100 रुपये प्रति डॉलर हो सकता है। सुब्रमण्यम का कहना है कि रुपये का कमजोर होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी नहीं है। उनका कहना है कि यह कदम भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने में मदद कर सकता है। उन्होंने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक केवल डॉलर-रुपया के रेट पर नजर नहीं रखता, बल्कि एक्सपोर्ट-इंपोर्ट, क्रूड ऑयल प्राइस और अन्य आर्थिक संकेतकों पर भी नजर रखता है। जब RBI को लगेगा कि दखल देने की जरूरत है, तब वह कार्रवाई करेगा।रुपया अपने सही लेवल की तलाश में है। एक साल से इसे प्रेशर का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन RBI जानबूझकर इसे फिसलने दे रही है ताकि टैरिफ का असर कम किया जा सके