
चंडीगढ़, 12 मार्च
पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि पंजाब विधानसभा में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और विपक्षी कांग्रेस आपसी तालमेल के साथ ड्रामा कर रही हैं ताकि पंजाब के लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा सके।
आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच एक गुप्त समझौता है, जिसके तहत विपक्ष जनता के मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछने के बजाय बार-बार वॉकआउट कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष ऐसे प्रस्ताव पारित कर रहा है जिनका जनकल्याण से कोई संबंध नहीं है।
सुनील जाखड़ ने विशेष रूप से विधानसभा के स्पीकर को याद दिलाया कि जुलाई 2025 के सत्र के दौरान धार्मिक बेअदबी से संबंधित कानून बनाने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन छह महीने बीत जाने के बावजूद सरकार उस कानून का मसौदा अभी तक मंजूर नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में इस मुद्दे पर गंभीर है तो स्पीकर को इस पर जवाब देना चाहिए या वर्तमान सत्र के दौरान सरकार को कानून का मसौदा पेश करने के लिए कहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज तक गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में न्याय नहीं मिला है और इसी कारण दो सरकारें बदल चुकी हैं और तीसरी भी बदल सकती है, फिर भी यह मुद्दा सरकार के एजेंडे में शामिल नहीं है।
जाखड़ ने पीआरटीसी की बसों को राजस्थान के सीकर जिले के पलसाना में बॉडी निर्माण और उन्हें आप पार्टी के रंगों में रंगने के लिए भेजे जाने को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बसों को रेक्स पाइप एंड केबल इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड द्वारा पेंट किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कंपनी से वही लोग जुड़े हुए हैं जिनकी कंपनी ने पिछली कांग्रेस सरकार के समय बसों की बॉडी तैयार की थी।
जाखड़ ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वह उस पुराने मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के उस पूर्व मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय वे उस फाइल का इस्तेमाल केवल उस नेता को ब्लैकमेल करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पुराने और नए लोगों की मिलीभगत से हुआ एक नया घोटाला प्रतीत होता है।
उन्होंने विपक्ष के नेता प्रताप बाजवा को चुनौती दी कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएं। जाखड़ ने कहा कि एक तरफ सरकार राज्य में निवेश सम्मेलन आयोजित कर रही है और दूसरी तरफ जालंधर की उद्योग इकाइयों का उपयोग करने के बजाय बसों को पेंट कराने के लिए 500 किलोमीटर दूर राजस्थान भेज रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इसके पीछे किन लोगों के आर्थिक हित जुड़े हुए हैं।
खनन के मुद्दे पर सरकार पर तीखा हमला करते हुए जाखड़ ने सरकारी आंकड़े जारी करते हुए बताया कि सरकार को वैध खनन से केवल 21.70 करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिली है, जबकि अवैध खनन पर लगाए गए जुर्मानों से 79.29 करोड़ रुपये वसूले गए हैं। इसके अलावा 89.23 करोड़ रुपये की एक और वसूली दिखाई गई है, जिसका स्रोत स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि वैध खनन की तुलना में अवैध खनन कहीं अधिक हो रहा है और वह भी सरकार के संरक्षण में। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन के मामलों में मामूली जुर्माना लगाकर मामले को निपटा दिया जाता है और बाकी पैसा किन तिजोरियों में जा रहा है, यह पंजाब की जनता जानना चाहती है।
जाखड़ ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के ताजा आदेशों के अनुसार अवैध खनन करते पकड़े गए ट्रक पर 4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए, लेकिन सरकार केवल 6 हजार रुपये का जुर्माना लगा रही है, जिसे उन्होंने मिलीभगत बताया। उन्होंने यह भी कहा कि एनजीटी ने केवल 13 क्रशरों पर 180 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है, जबकि राज्य में 400 से अधिक क्रशर चल रहे हैं।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अब सरकार विधानसभा में ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रही है जिससे एनजीटी के आदेशों को निष्प्रभावी किया जा सके, ताकि पंजाब के प्राकृतिक संसाधनों की लूट जारी रह सके और क्रशरों तथा अन्य संचालकों से पर्दे के पीछे होने वाली वसूली और बढ़ सके।
जाखड़ ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने खनन से 20,000 करोड़ रुपये की आय का वादा किया था और यदि एनजीटी की दरों के अनुसार वसूली की जाए तो यह संभव भी है। लेकिन जब वैध खनन से केवल लगभग 21 करोड़ रुपये की आय हुई है, तो इससे स्पष्ट हो गया है कि असली खनन तो पंजाब के खजाने और प्राकृतिक संसाधनों का हो रहा है और यह पैसा कहीं और जा रहा है।
उन्होंने अंत में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार का असली चेहरा उजागर हो चुका है और लोग अब अवैध खनन के इस खेल का सच खुली आंखों से देख रहे हैं। उनके अनुसार जनता 2027 के चुनावों में इसका जवाब देगी।