
सीटी यूनिवर्सिटी के डिवीजन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर एक सार्थक और विचारोत्तेजक पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा का विषय था — “महिलाओं के बारे में वह बातें जिन्हें पुरुष अक्सर नहीं समझ पाते: उनकी सुरक्षा से आगे बढ़कर उनकी व्यक्तिगत पहचान का सम्मान करना।”
इस सत्र का उद्देश्य समाज में महिलाओं को केवल रूढ़िगत धारणाओं के आधार पर देखने की सोच को बदलना और उनकी व्यक्तिगत पहचान, शक्ति और आकांक्षाओं को समझने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
पैनल चर्चा में कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया और लैंगिक समानता, सम्मान और सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
इस चर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सुमन सेठी (एमबीबीएस, एमडी – मेडिसिन, डीएम – नेफ्रोलॉजी) उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन जस्नूर धवन ने एमसी (मास्टर ऑफ सेरेमनी) के रूप में किया और पूरे सत्र को रोचक व प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ाया।
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने बताया कि समाज में महिलाओं को अक्सर पहले से तय भूमिकाओं के आधार पर देखा जाता है, जबकि उनकी व्यक्तिगत पहचान, सपने और क्षमताएँ कई बार नजरअंदाज हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सच्चा सशक्तिकरण केवल उनकी सुरक्षा में नहीं, बल्कि उनके निर्णयों, विचारों और स्वतंत्रता का सम्मान करने में है।
पैनल ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में समानता, संवेदनशीलता और पारस्परिक सम्मान की सोच अपनाएं।
इस अवसर पर सीटी यूनिवर्सिटी के चांसलर सरदार चरणजीत सिंह चन्नी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को पहचानना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान एक प्रगतिशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहां महिलाओं को सम्मान, गरिमा और समान अवसर मिलते हैं।
वहीं, प्रो-चांसलर डॉ. मनबीर सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस प्रकार की चर्चाएँ युवाओं को रूढ़िगत सोच को चुनौती देने और परिसर में समावेशी तथा सम्मानजनक माहौल बनाने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण उनकी व्यक्तिगत पहचान को समझने और उनके सपनों को बिना किसी भेदभाव के समर्थन देने से शुरू होता है।
इस सत्र में छात्रों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वक्ताओं से सवाल पूछकर चर्चा को और भी प्रभावशाली बनाया।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि हमें महिलाओं को केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखने की पारंपरिक सोच से आगे बढ़ना चाहिए और ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जहां महिलाओं को उनकी असली पहचान के साथ महत्व, सम्मान और सराहना मिले