जब सपनों को अभिव्यक्ति मिलती है और मासूमियत कल्पना से मिलती है,तब एक उत्सव जन्म लेता है।
रंगों, लय और उज्ज्वल मुस्कानों से सुसज्जित स्वामी संत दास किंडरगार्टन, जालंधर ने 13 फरवरी को मुख्य विद्यालय परिसर में अपना वार्षिक उत्सव “द ड्रीमस्फीयर” अत्यंत उत्साह और भव्यता के साथ प्रस्तुत किया। यह अवसर विद्यालय के उस दृष्टिकोण का उज्ज्वल प्रमाण बना, जिसके अंतर्गत ज्ञान, सृजनात्मकता और सुदृढ़ नैतिक मूल्यों के साथ नन्हे मस्तिष्कों का पोषण किया जाता है।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जो ज्ञान की उस शाश्वत ज्योति का प्रतीक है जो प्रत्येक विद्यार्थी के पथ को आलोकित करती है। हेड गर्ल एरिका द्वारा गरिमामय स्वागत के पश्चात् प्रधानाचार्या डॉ. सोनिया मागो ने प्रेरणादायी संबोधन दिया, जिसमें विद्यालय की उपलब्धियों और समग्र शिक्षा के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया।
समारोह को विद्यालय के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी शांतानंद जी की गरिमामयी उपस्थिति से दिव्य आशीर्वाद प्राप्त हुआ। अपने ज्ञानवर्धक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा चरित्र निर्माण करती है, नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करती है तथा अनुशासित और संवेदनशील व्यक्तित्व का निर्माण करती है। उनके आशीर्वचनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों एवं प्रबंधन समिति के सम्मानित सदस्यों — बाबा राम दास जी, बाबा चरण दास जी, श्री अजीत सिंह राजपाल, श्री वाई.एस. प्रुथी, सीए आर.एस. कालरा, श्रीमती अंजु मेहता (निदेशक एवं प्रधानाचार्या, स्वामी संत दास पब्लिक स्कूल, फगवाड़ा), श्रीमती टी.पी. कौर (पूर्व प्रधानाचार्या) तथा डॉ. जगमोहन मागो — की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम का आरंभ भावपूर्ण स्कूल शबद से हुआ, जिसके पश्चात् रंगारंग प्रस्तुतियों की श्रृंखला प्रस्तुत की गई — “एक ही रूप, अनेक स्वरूप”, “भारत की चंद्र यात्रा”, “द रिटर्न ऑफ द पाइ़ड पाइपर”, “सुनो नन्हे सुरों की कहानी”, “आज का अभिमन्यु” तथा भव्य समापन प्रस्तुति “सपनों की उड़ान”।

प्रत्येक प्रस्तुति ने सपनों, एकता, साहस और आकांक्षाओं की थीम को अत्यंत सुंदरता से अभिव्यक्त किया।
शास्त्रीय नृत्य “एक ही रूप, अनेक स्वरूप” तथा कोरियोग्राफी “सपनों की उड़ान” को सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति का पुरस्कार प्रदान किया गया, साथ ही क्रमशः ₹10,000 और ₹15,000 की नगद राशि भी प्रदान की गई।
समारोह का समापन हेड बॉय साधिक मिनोचा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन तथा राष्ट्रगान के गंभीर गायन के साथ हुआ।
“द ड्रीमस्फीयर” केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं था, बल्कि यह आकांक्षाओं, उपलब्धियों और स्थायी मूल्यों की उज्ज्वल अभिव्यक्ति था — जो स्वामी संत दास किंडरगार्टन, जालंधर की उत्कृष्टता और आदर्शों का सच्चा प्रतिबिंब है।