
प्रयागराज; संगम नगरी में इस वर्ष माघ मेले की रौनक अपनी पूरी भव्यता पर है। आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर इस मेले में अब तक 18 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर पुण्य की डुबकी लगाई है। यह आंकड़ा न केवल प्रशासनिक रूप से ऐतिहासिक है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के अटूट विश्वास का भी प्रमाण है।संगम तट का दृश्य इन दिनों किसी दिव्य लोक से कम नहीं लग रहा है। भोर के समय जब सूर्य की सुनहरी किरणें नदी की लहरों और कोहरे के बीच से छनकर आती हैं, तो पूरा मेला क्षेत्र अलौकिक आभा से भर जाता है। चारों ओर गूंजते शंखनाद, साधु-संतों के मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं के हर-हर गंगे के जयकारों ने प्रयागराज को साक्षात स्वर्ग बना दिया है। रात के समय तंबुओं के शहर की रोशनी पानी में ऐसे झलकती है मानो आसमान के तारे जमीन पर उतर आए हों।18 करोड़ का भारी आंकड़ा भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के प्रति लोगों के बढ़ते झुकाव को दर्शाता है। इतनी विशाल जनशक्ति के बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुगम दर्शन के लिए कड़े इंतजाम किए हैं।