
चंडीगढ़, 13 अप्रैल:
सरकार की नियत पर सवाल
पंजाब विधानसभा में मीडिया से बातचीत करते हुए अश्वनी शर्मा, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी पंजाब एवं विधायक, पठानकोट ने कहा कि “कानून नियत से चलते हैं, नियत होनी चाहिए, पर पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार की नियत नहीं है। बरगाड़ी में हुई बेअदबी के मामले में सरकार बनने से पहले अरविन्द केजरिवल ने कहा था कि सरकार बनते ही 24 घंटे में न्याय देंगे और दोषियों को अंदर करेंगे, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी सजा नहीं हुई और पिछले चार सालों में बरगाड़ी बेअदबी के मामलों में सरकार की कार्रवाई ढीली रही।”
➤ कार्रवाई में देरी और ढिलाई
अश्विनी शर्मा ने कहा कि बरगाड़ी बेअदबी से जुड़े मामलों में न्याय प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया गया। उन्होंने बताया कि मई 2022 में पंजाब पुलिस की एसआईटी ने गृह विभाग से 295ए के तहत आरोपियों के खिलाफ केस चलाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन यह मंजूरी लगभग ढाई साल बाद 21 अक्टूबर 2024 को दी गई। उन्होंने कहा कि इतनी देरी यह साबित करती है कि सरकार इन मामलों में गंभीर नहीं है और दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया।
➤ सुप्रीम कोर्ट में सरकार की भूमिका पर सवाल
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार और Gurmeet Ram Rahim Singh के वकीलों द्वारा समान एफिडेविट दाखिल करना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि 2015 के तीनों प्रमुख बेअदबी मामलों—गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप की चोरी, आपत्तिजनक पोस्टर लगाने और फटे हुए अंग मिलने—के ट्रायल को प्रभावित किया गया और 29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई।
➤ आंकड़े बताते हैं सरकार की विफलता
शर्मा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1 जून 2015 से अब तक कुल 597 बेअदबी के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से मात्र 44 मामलों में ही दोष सिद्ध हो पाया है। उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत से भी कम मामलों में सजा होना सरकार की कमजोर पैरवी और प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि 131 मामलों में अभी सुनवाई चल रही है, जबकि बड़ी संख्या में मामलों को रद्द या खारिज कर दिया गया, जो न्याय व्यवस्था के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।
➤ 2025 के बिल पर सरकार की चुप्पी
अश्विनी शर्मा ने “पंजाब पवित्र ग्रंथ विरुद्ध अपराध के रोकथाम के बारे बिल 2025” पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद गीता, कुरान शरीफ और बाइबिल जैसे सभी प्रमुख धर्मों के पवित्र ग्रंथों के अपमान पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि इस बिल को 6 महीने के भीतर सिलेक्ट कमेटी से रिपोर्ट देने के लिए भेजा गया था, लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी इसकी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की न तो इस मुद्दे पर कोई गंभीरता है और न ही कोई ठोस नीति।
➤ संशोधन बिल पर उठाए सवाल
“जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब संशोधन बिल 2026” पर बोलते हुए अश्विनी शर्मा ने कहा कि सरकार इस संवेदनशील विषय पर बिना किसी व्यापक विचार-विमर्श के आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि न तो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और न ही अन्य मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों से कोई सलाह ली गई। उन्होंने इसे 1959 के नेहरू-तारा सिंह समझौते की भावना के खिलाफ बताया।
➤ सभी धर्मों के लिए समान कानून की मांग
उन्होंने कहा कि सरकार केवल एक धर्म से जुड़े मामलों पर कानून लाकर समाज में असंतुलन पैदा कर रही है, जबकि अन्य धर्मों से जुड़े मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों का समान सम्मान होना चाहिए और कानून भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
➤ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
अंत में, अश्विनी शर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दों को उठा रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार बेअदबी के मामलों में निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे तथा दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाए, ताकि लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बहाल हो सके।