
दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को 2026 के अपने पहले ऑर्बिटल मिशन में तकनीकी असफलता का सामना करना पड़ा है। इस मिशन के तहत PSLV-C62 रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था, लेकिन रॉकेट से जुड़ा मुख्य सैटेलाइट तय कक्षा में स्थापित नहीं हो सका। यह लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के पहले लॉन्च पैड से किया गया था। उड़ान के शुरुआती चरणों में रॉकेट की कार्यप्रणाली सामान्य रही, लेकिन ऑर्बिट में सैटेलाइट की तैनाती से पहले मिशन में गड़बड़ी सामने आई।EOS-N1 ‘अन्वेषा’ था मिशन का प्रमुख पेलोड इस मिशन का मुख्य पेलोड EOS-N1, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया था, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित किया गया एक हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट था। इसे उन्नत पृथ्वी अवलोकन से जुड़े विभिन्न उपयोगों के लिए तैयार किया गया था। अन्वेषा सैटेलाइट का उद्देश्य पृथ्वी की सतह से जुड़े सूक्ष्म डेटा को उच्च गुणवत्ता के साथ एकत्र करना था, जिससे रक्षा और निगरानी से जुड़े अनुप्रयोगों में मदद मिल सकती थी।