जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लम्मपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक गुरुवारिय निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान रवि से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने दिव्य हवन-यज्ञ के अवसर पर उपस्थित मां भक्तों को आध्यात्मिक प्रवचनों का रसपान करवाया। इस दौरान उन्होंने जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में समझाते हुए प्रेरणादायक पंक्तियों का उल्लेख किया—
*समय-समय बदलता सामर्थ्य,*
*वही घोड़ा, वही रथ।*
*आज जो हार कहलाए,*
*कल बने वही समर्थ॥*

इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट करते हुए नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि जीवन केवल घटनाओं की श्रृंखला नहीं, बल्कि आत्मा की एक दिव्य यात्रा है। इस यात्रा में समय-समय पर मनुष्य का सामर्थ्य बदलता प्रतीत होता है। कभी वही शक्ति हमें आगे बढ़ाती है, तो कभी वही हमें दुर्बलता का अनुभव कराती है। किंतु सत्य यह है कि आत्मा न कभी कमजोर होती है, न ही पराजित।
प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने भक्तों को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि वही घोड़ा, वही रथ का तात्पर्य यह है कि जीवन के साधन अधिकांशत: वही रहते हैं — शरीर, मन और बुद्धि; वर्षों तक ये हमारे साथ रहते हैं, किंतु जब चेतना का स्तर परिवर्तित होता है, तब यही साधन नया अर्थ ग्रहण कर लेते हैं। अज्ञान की अवस्था में ये बंधन बनते हैं, जबकि ज्ञान की अवस्था में यही साधन मुक्ति का मार्ग बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जिसे हम आज हार मानते हैं, वह वास्तव में आत्मा का दंड नहीं, बल्कि ईश्वर की शिक्षा होती है। परमात्मा मनुष्य को कभी तोड़ता नहीं, वह केवल उसे परिष्कृत करता है। जब अहंकार टूटता है, तभी भीतर आत्मबल का7 जन्म होता है। जिस क्षण मनुष्य झुकता है, उसी क्षण उसका वास्तविक सामर्थ्य जागृत होने लगता है
नवजीत भारद्वाज जी ने आगे कहा कि समय ईश्वर की वह लीला है जो मनुष्य को धैर्य, विश्वास और समर्पण सिखाती है। जो आज असमर्थ प्रतीत होता है, वही साधना और श्रद्धा के बल पर कल समर्थ बन जाता है। जब मनुष्य यह समझ लेता है कि हर पराजय उसे प्रभु के और निकट ले जाने का माध्यम है, तब दुख भी प्रसाद बन जाता है। तब वही रथ जीवन की दौड़ नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा बन जाता है। अंत में उन्होंने कहा कि न हार स्थायी है, न विजय — स्थायी केवल आत्मा है, जो हर समय, हर परिस्थिति में पूर्ण सामर्थ्य से युक्त रहती है।

इस अवसर पर राकेश प्रभाकर,सरोज बाला, समीर कपूर,अमरेंद्र कुमार शर्मा, प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,नरेश,कोमल, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,धर्मपालसिंह, अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत, मनीष शर्मा,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ, नरेश,दिक्षित, अनिल,अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।