जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान रविंद्र सिंह से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने दिव्य हवन-यज्ञ के अवसर पर उपस्थित प्रभु भक्तों को प्रवचनों के माध्यम से प्रभु चरणों से जोड़ते हुए बुल्ले शाह की सूफी पंक्तियों को अनुसरण करते हुए कहा कि
*कोई रंग सावा,*
*कोई रंग पीला,*
*कोई लाल गुलाबी करदा है।*
*बुल्ले शाह रंग मुर्शिद वाला,*
*किसी-किसी नू चढ़दा।*
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि ये पंक्तियाँ केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार हैं। सूफी संत बुल्ले शाह जी ने इन पंक्तियों में जीवन का वह रहस्य खोल दिया है, जिसे समझ लेने के बाद इंसान का दृष्टिकोण ही बदल जाता है।
इस संसार में हर मनुष्य किसी न किसी रंग में रंगा हुआ है। कोई धन के रंग में, कोई पद-प्रतिष्ठा के रंग में, कोई रिश्तों के मोह में, तो कोई बाहरी भक्ति और दिखावे के रंग में उलझा हुआ है। ये सारे रंग देखने में चमकीले जरूर होते हैं, लेकिन स्थायी नहीं होते। समय के साथ ये रंग फीके पड़ जाते हैं। लेकिन बुल्ले शाह जी कहते हैं — इन सबसे ऊपर एक रंग है, मुर्शिद (भगवान) का रंग। यह वह रंग है जो कपड़ों पर नहीं, आत्मा पर चढ़ता है। यह रंग अहंकार को धो देता है, ‘‘मैं’’ को मिटा देता है और इंसान को इंसान से ऊपर उठाकर इंसानियत से जोड़ देता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि मुर्शिद (भगवान) का रंग हर किसी को नहीं चढ़ता। इसके लिए केवल ज्ञान नहीं, बल्कि समर्पण चाहिए। इसके लिए दिखावटी पूजा नहीं, बल्कि भीतर की सच्चाई चाहिए। जब शिष्य अपने भीतर झाँकना सीख लेता है, जब वह स्वयं को मिटाने को तैयार हो जाता है, तभी मुर्शिद की नजर-ए-करम उस पर पड़ती है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रभु भक्तों को अध्यात्मिक गूढ़ रहस्य बताते हुए कहा कि यह मुर्शिद (भगवान) का रंग चढ़ जाए तो फिर संसार की प्रशंसा और निंदा समान लगने लगती है। सुख-दुख, लाभ-हानि, मान-अपमान सब एक जैसे प्रतीत होते हैं। क्योंकि मुर्शिद का रंग इंसान को जोड़ देता है उस शक्ति से, जो समय, परिस्थिति और भय से परे है। इसीलिए कहा गया है मुर्शिद का मिलना सौभाग्य है, पर मुर्शिद के रंग में रंग जाना परम कृपा।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रवचनों के अंत में कहा कि बुल्ले शाह की इन पंक्तियों से संदेश मिलता है कि जब जीवन में बेचैनी हो, खालीपन हो, और सब कुछ होते हुए भी शांति न मिले तब समझ लेना चाहिए कि हमें बाहरी रंग नहीं, बल्कि अंदर के रंग की तलाश है। क्योंकि जब मुर्शिद का रंग चढ़ता है, तो इंसान बदलता नहीं निखर जाता है।

इस अवसर पर मनी राम,समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा,रिंकू सैनी, कमलजीत, नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत, मनीष शर्मा ,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय,बलदेव सिंह सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।