चंडीगढ़, 17/02/26
भारतीय जनता पार्टी पंजाब के प्रदेश प्रेस सचिव हरदेव सिंह उभ्भा ने पंजाब राज्य कोऑपरेटिव एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट बैंक (पूर्व में लैंड मॉर्गेज बैंक) की वर्तमान वित्तीय और प्रशासनिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह संस्था, जिसकी स्थापना वर्ष 1957 में किसानों को सूदखोर महाजनों के चंगुल से बचाने के लिए की गई थी, आज स्वयं गंभीर संकट का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार यदि इस बैंक को बंद करने का विचार कर रही है तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गलत कदम होगा, जिसे पंजाब के लोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
उभ्भा ने कहा कि यह बैंक पंजाब की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी रहा है। वर्तमान में बैंक से 42,000 से अधिक कर्जधारी किसान, लगभग 9 लाख शेयरधारक और पूरे पंजाब में 89 शाखाएं जुड़ी हुई हैं। नाबार्ड के साथ वित्तीय संबंध होने के बावजूद बैंक कभी डिफॉल्टर नहीं बना और वर्तमान में भी केवल लगभग 200–300 करोड़ रुपये की बकाया राशि शेष है।
हालांकि, कर्जों की कम वसूली, विभिन्न सरकारों द्वारा किए गए कर्जमाफी के वादे, दीर्घकालिक वित्तीय योजना की कमी तथा उच्च प्रबंधन की विफलता के कारण बैंक इस समय गंभीर संकट में है। अन्य राज्यों की तरह एकमुश्त निपटान (OTS) योजना लागू न किए जाने से भी स्थिति बिगड़ी है।
वर्तमान स्थिति के अनुसार लगभग 1600 करोड़ रुपये मूलधन और 1000 करोड़ रुपये ब्याज किसानों की ओर से बकाया हैं। गंभीर वित्तीय अव्यवस्था के कारण बैंक के विलय या परिसमापन (लिक्विडेशन) पर भी विचार किया जा रहा है, जबकि इसमें वर्तमान कर्मचारियों की कोई गलती नहीं है।
उभ्भा ने कहा कि यह बैंक किसानों को साधारण ब्याज (Simple Interest) पर ऋण देने वाला एकमात्र संस्थान है, जो इसे वाणिज्यिक बैंकों और उच्च ब्याज दर वाली निजी वित्तीय संस्थाओं से अलग बनाता है। यदि यह बैंक बंद हो जाता है तो बड़ी संख्या में किसान फिर से ऊंचे ब्याज वाले कर्ज के जाल में फंस सकते हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक होगा।
उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में भाजपा सरकार द्वारा लगभग 200 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष सहायता दी जाती है तथा हरियाणा, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में एकमुश्त सेटलमेंट योजना के माध्यम से पूरा ब्याज माफ कर किसानों को राहत दी गई है। पंजाब सरकार को भी छोटे और सीमांत किसानों के लिए संपूर्ण ब्याज माफी और एकमुश्त निपटान योजना लागू करनी चाहिए।
उन्होंने याद दिलाया कि 26 दिसंबर 2021 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा दो लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने की घोषणा की गई थी, लेकिन अधिसूचना जारी न होने के कारण इसे लागू नहीं किया गया। कई ऐसे किसान हैं जिनका मूलधन 50,000 रुपये था, लेकिन ब्याज चार गुना बढ़कर दो लाख रुपये से अधिक हो चुका है और वे एकमुश्त योजना की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
हरदेव सिंह उभ्भा ने स्पष्ट किया कि भगवंत मान सरकार इस बैंक को बंद करने की गलती न करे, क्योंकि यह कदम किसान विरोधी होगा और किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार तुरंत नीतिगत हस्तक्षेप करे, वित्तीय पुनर्गठन योजना लागू करे, जिम्मेदार प्रबंधन सुधार सुनिश्चित करे और बैंक को बचाने के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की घोषणा करे। इससे किसानों, कर्मचारियों, पेंशनरों और 9 लाख शेयरधारकों के हितों की रक्षा की जा सकेगी।
भाजपा पंजाब किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है और यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए तो भाजपा इस मुद्दे को जन आंदोलन बनाएगी।