
जालंधर, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रीजेंट पार्क, जालंधर में ‘भज गोविंदम’ भजन संध्या का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री जयंती भारती जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जीवन एवं शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में भौतिक उपलब्धियों के बावजूद मनुष्य तनाव, अवसाद, नशे और मानसिक अशांति जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं का स्थायी समाधान केवल आध्यात्मिक जागृति एवं आत्मज्ञान के माध्यम से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन प्रेम, सेवा, कर्तव्य, करुणा, प्रकृति संरक्षण और धर्म के आदर्शों से परिपूर्ण है। यदि युवा वर्ग श्रीकृष्ण के चरित्र का अनुसरण करे तो वह न केवल नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रह सकता है, बल्कि तनावमुक्त, सकारात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन भी जी सकता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पूर्व था। गीता हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, विवेक और निष्काम कर्म का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है।
साध्वी जी ने बताया कि विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में भी यह पाया गया है कि नियमित ध्यान, भक्ति-संगीत, सत्संग एवं आध्यात्मिक साधना मानसिक तनाव को कम करने, भावनात्मक संतुलन बढ़ाने तथा जीवन में सकारात्मकता लाने में सहायक सिद्ध होते हैं। वहीं प्रकृति के साथ समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है तथा व्यक्ति में संवेदनशीलता एवं संतुलित जीवनशैली का विकास होता है। यही संदेश भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से भी प्राप्त होता है।
भजन संध्या के दौरान अनेक भक्तिमय भजनों की मनमोहक प्रस्तुति ने वातावरण को कृष्णमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर प्रभु नाम का गुणगान करते हुए भावविभोर हो उठे।
इस अवसर पर डॉ. अजय गुप्ता परिवार ने कथा व्यास साध्वी सुश्री जयंती भारती जी को प्रभु श्रीकृष्ण की सुंदर एवं मनमोहक प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही उपस्थित संत समाज का भी सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में जालंधर शाखा प्रमुख साध्वी पल्लवी भारती जी सहित साध्वी रीता भारती जी, साध्वी रीना भारती जी, स्वामी सज्जनानंद, डॉ. केशव गुप्ता, डॉ. हिमांशी गुप्ता, सुखदेव सिंह जी, आशीष गुप्ता जी, डॉ. नरेश चोडा जी, अरुण अग्रवाल जी सहित बड़ी संख्या में प्रभुभक्त उपस्थित रहे। सभी ने प्रवचनों एवं भजनों के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त की तथा ऐसे आयोजनों को समाज में नैतिक एवं आध्यात्मिक जागृति का प्रभावी माध्यम बताया।