जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान देव कपूर से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम के मुख्य प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित मां भक्तों पर प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए कहते है कि मनुष्य को भक्ति के लिए जगह-जगह नहीं भटकना चाहिए। जिन्होंने भक्ति के लिए एक का ही सहारा लिया है ईश्वर ने भी उनकी सहायता की। जो मनुष्य दर-दर भटकता उसकी कोई रक्षा नहीं करता। नवजीत भारद्वाज जी ने गुरुवाणी के श्लोक का अनुवाद करते हुए कहा कि
*एक ऊपरी जिस जन की आसा तिसकी कटिए जम की पासा*
जो अपना अंतिम भरोसा ईश्वर पर रखता है। उसे विश्वास है कि जीवन और मृत्यु उस ईश्वर के हाथ में है। जब उसे कोई नुकसान होता है या मुश्किल आती है, तो वह घबराता नहीं है, बल्कि ईश्वर की इच्छा मानकर शांति बनाए रखता है। मृत्यु के समय भी वह शांत रहता है, क्योंकि उसे किसी वस्तु से लगाव नहीं होता और उसे यम का भी भय नहीं सताता।
नवजीत भारद्वाज जी ने मां भक्तों को महाभारत के महत्वपूर्ण प्रसंगों से समझाया कि दुर्योधन के आदेश पर, दुशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का वस्त्र खींचना शुरू किया, ताकि उन्हें अपमानित किया जा सके। सभी चुपचाप यह सब देखते रहे।
जब द्रौपदी ने अपनी रक्षा के लिए हर मानवीय प्रयास विफल होते देखा, तो उन्होंने पूरी तरह से भगवान कृष्ण को समर्पित होकर पुकारा। भगवान कृष्ण ने चमत्कारिक रूप से द्रौपदी की साड़ी को असीमित लंबाई तक बढ़ा दिया। दुशासन साड़ी खींचते-खींचते थक गया, लेकिन साड़ी खत्म नहीं हुई, जिससे द्रौपदी की गरिमा और सम्मान की रक्षा हुई।
इसी तरह एक ओर प्रेरक प्रसंग सुनाते उन्होंने कहा कि टटहरी (पक्षी) जोकि आमतौर पर जमीन पर ही अपना घोंसला बनाती है। महाभारत के दौरान कुरुक्षेत्र की रणभूमि में युद्ध के समय टटहरी को अपने घोंसले और अपने अंडों की फिक्र हो रही थी। घोड़े और हाथियों के पैरों के नीचे उसका घोंसला बर्बाद हो सकता। तभी टटहरी ने पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ कहा – ‘प्रभु! आप कैसे और क्या करते हैं, वो मैं नहीं जानती। मैं स्वयं को अपने परिवार सहित आपको समर्पित करती हूं। अब हमारी जान आपके हाथों में है’। इतने छोटे से पक्षी की पुकार भी भगवान श्रीकृष्ण ने सुनी तभी एक हाथी की गर्दन में लटकी विशालकाय घंटी को तीर से नीचे गिराकर घोंसले और टटहरी के अंडों के ऊपर सुरक्षित रख दिया।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि यह कथाएँ इस बात पर जोर देती हैं कि जब भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान को पुकारता है और स्वयं को असहाय पाकर उस पर पूर्ण विश्वास करता है, तो भगवान उसकी रक्षा के लिए अवश्य आते हैं।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, राकेश प्रभाकर,सरोज बाला, समीर कपूर,अमरेंद्र कुमार शर्मा, प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल,अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।