एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स जालंधर की स्थापना का उद्देश्य ही ललित कलाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन में अपना योगदान देते हुए इन कलाओं को जन-मन तक पहुंचाना रहा है। इसी श्रृंखला में कॉलेज के परफोर्मिंग आर्ट विभाग द्वारा बिहार के भागलपुर घराने में जन्मे न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त डॉ संतोष कुमार नाहर को वायलिन वादन के लिए आमंत्रित किया गया। बिहार के मिश्र(भागलपुर घराने) में जन्मे डॉ संतोष नाहर ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने गुरु पिता स्वर्गीय प्रोफेसर प्रहलाद प्रसाद मिश्र जी से ली इसके अलावा संगीत जगत के दिग्गज संगीतकारों पंडित केदारनाथ मिश्र,पंडित रामनरेश मिश्रा,श्री टी.एम पटनायक और उनके बड़े भाइयों पंडित संगीत नाहर तथा डॉ साहित्य नाहर जैसे विद्वान संगीताकारों का सान्निध्य एवं मार्गदर्शन भी उन्हें प्राप्त हुआ। सुर रत्न, वाद्य रत्न,सुरमणि एवं संगीत भूषण जैसे सम्मानों से सम्मानित तथा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन, स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन में अपने संगीत का जादू दिखा चुके हैं । प्राचार्य डॉ नीरजा ढींगरा ने इस विशेष अवसर पर एपीजे एजुकेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ सत्यपाॅल जी, एपीजे एजुकेशन एवं एपीजे सत्या एंड स्वर्ण ग्रुप की अध्यक्ष
तथा एपीजे सत्या यूनिवर्सिटी की चांसलर श्रीमती सुषमा पॉल बर्लिया तथा कोओनर एंड डायरेक्टर फैमिली बिज़नेस बोर्ड एपीजे सत्या एंड स्वर्ण ग्रुप, लीड एजुकेशन वर्टिकल ऑफिस बियरर एपीजे एजुकेशन डॉ नेहा बर्लिया की दूरदर्शिता को नतमस्तक होते हुए कहा कि उनकी संगीत के प्रति लग्न एवं प्रेम की वजह से आज इतने महान कलाकारों को हम अपने रूबरू परफॉर्म करते हुए देख पा रहे हैं। डॉ ढींगरा ने एपीजे एजुकेशन की निदेशक डॉ सुचरिता शर्मा का अभिनंदन करते हुए कहा कि संगीत के इस भव्य समारोह में आपकी उपस्थिति निश्चित रूप से हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। डॉ संतोष नाहर का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि संगीत जगत का एक प्रतिष्ठित सितारा आज हमारे बीच मौजूद है उन्होंने कहा कि जिस तरह निरंतर मेहनत एवं लग्न से डॉ नाहर ने इस मुकाम को हासिल किया है तो निश्चित रूप से हमारे कॉलेज के विद्यार्थी उनसे न केवल प्रेरित होंगे बल्कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए निरंतर अभ्यास कितना जरूरी है ये भी समझ पाएंगे। डॉ संतोष नाहर ने राग पटदीप का तीन ताल, राजस्थानी लोक गीत केसरिया पधारों म्हारे देस,इक प्यार का नगमा हैं, होंठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो,तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जीएं, पायों जी मैंने राम रत्न धन पायो भजन तथा पंजाबी लोकगीत छल्ला बजाकर श्रोताओं को वायलिन की सुरमयी स्वर-लहरियों से सम्मोहित कर दिया। संगीत के इस महफिल में तबले पर श्री रहमत सिद्धु एवं श्री रत्नलाल मिश्रा ने साथ दिया एवं डॉ सुमित सिंह ‘पदम’ ने श्रेष्ठ मंच संचालन करते हुए कार्यक्रम का सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ नीरजा ढींगरा ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कॉलेज के कल्चरल कोऑर्डिनेटर डॉ अरुण मिश्रा,डीन यूथ फेस्टिवल डॉ अमिता मिश्रा एवं डॉ मिक्की वर्मा के प्रयासों की भरपूर सराहना करते हुए कहा कि वे इसी तरह भविष्य में भी ऐसी कार्यक्रमों का आयोजन करते रहे।