
दिल्ली: भारत की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी ISRO इस वक्त वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बड़े पैमाने पर संस्थान छोड़ने के संकट से जूझ रही है। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों के भीतर इसरो के करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इनमें से कई वैज्ञानिक देश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘गगनयान’ और ‘चंद्रयान’ जैसे बड़े मिशनों की रीढ़ थे।वैज्ञानिकों के इस तरह अचानक संस्थान छोड़ने से केंद्र सरकार और अंतरिक्ष विभाग में खलबली मच गई है। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने 14 जुलाई 2026 को एक बेहद सख्त आधिकारिक आदेश जारी किया है जिसके तहत वैज्ञानिकों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के नियमों को पहले से कहीं ज्यादा कड़ा कर दिया गया है।इसरो में वर्तमान में कुल मिलाकर लगभग 14,600 कर्मचारी काम करते हैं। आंतरिक सूत्रों के अनुसार इस्तीफे की सबसे बड़ी लहर इसरो के दो बड़े सेंटर्स में देखी गई है। बेंगलुरु स्थित इस केंद्र से सबसे अधिक झटका लगा है जहां अकेले करीब 80 वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने एक साथ संस्थान को अलविदा कह दिया