दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा फैसले ने भारतीय फार्मा सेक्टर में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं के साथ-साथ उनके एक्टिव इनग्रेडिएंट्स पर 100% Tarrif लगाने की घोषणा की है। इस कदम का सीधा असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा जो अमेरिकी बाजार में अपनी इनोवेटिव और खास दवाओं के जरिए पहचान बना रही हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि जेनेरिक और बिना ब्रांड वाली दवाओं को इस भारी टैक्स से बाहर रखा गया है, जिससे भारत के बड़े दवा निर्यातक काफी हद तक सुरक्षित रहेंगे।ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और दवाओं की आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। आदेश के मुताबिक, अमेरिका में आयात की जाने वाली ब्रांडेड या पेटेंटेड दवाओं पर भारी टैक्स लगाया जाएग हालांकि, जिन कंपनियों ने अमेरिकी सरकार के साथ “मोस्ट फेवर्ड नेशन” प्राइसिंग डील की है और अमेरिका में दवाओं का उत्पादन शुरू करने के लिए फैक्ट्रियां बना रही हैं, उन्हें पूरी तरह टैरिफ से छूट दी जाएगी। वहीं जो कंपनियां अभी ऐसी डील नहीं कर पाई हैं लेकिन अमेरिका में निवेश कर रही हैं, उन पर शुरुआत में 20 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जो अगले चार साल में बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।