
राष्ट्र-निर्माण तथा सामुदायिक सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट परिचय देते हुए डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के 35 से अधिक विद्यार्थियों ने नगर निगम, जालंधर के आयुक्त श्री संदीप ऋषि (आईएएस) के मार्गदर्शन में संचालित जनगणना सर्वेक्षण में गणनाकर्ता (एन्यूमरेटर) के रूप में सक्रिय सहभागिता निभाई।
राष्ट्रीय महत्त्व के इस महत्त्वपूर्ण अभियान में युवाओं की भागीदारी अत्यंत प्रशंसनीय है। इस कार्य के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल एक महत्त्वपूर्ण शासकीय पहल में सार्थक योगदान दिया, बल्कि क्षेत्रीय कार्य (फील्डवर्क) का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हुए सामाजिक एवं संप्रेषण कौशलों का भी विकास किया।
विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित समर्पण, निष्ठा और उत्तरदायित्व की सराहना करते हुए नगर निगम, जालंधर के संयुक्त आयुक्त श्री राजेश खोखर ने उनके प्रयासों की खूब प्रशंसा की। उन्होंने युवाओं में नागरिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार तथा उप-प्राचार्या श्रीमती सोनिका दानिया के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने विद्यार्थियों को इस महत्त्वपूर्ण दायित्व के निर्वहन हेतु प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों में सहभागिता विद्यार्थियों को अनुभवात्मक अधिगम (एक्सपीरिएंशियल लर्निंग) के अवसर प्रदान करती है तथा उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व एवं लोकसेवा की भावना का विकास करती है। उन्होंने कहा कि डी.ए.वी. कॉलेज सदैव ऐसे जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहा है, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान दें।
डॉ. अनूप कुमार ने आगे कहा कि शिक्षा केवल कक्षा-कक्षों तक सीमित नहीं है। जनगणना जैसे अभियान विद्यार्थियों को समाज के विभिन्न वर्गों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने, जमीनी वास्तविकताओं को समझने तथा सहानुभूति, संप्रेषण-कौशल और नागरिक चेतना विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर अपने विद्यार्थियों को राष्ट्र-निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए निरंतर प्रोत्साहित करता है, जिससे उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास हो सके और वे उत्तरदायी नागरिक बन सकें।
यह पहल डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर की समग्र एवं मूल्यपरक शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का एक और उत्कृष्ट उदाहरण है, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सार्थक सामुदायिक सहभागिता को भी समान महत्त्व देता है तथा भविष्य के सामाजिक रूप से उत्तरदायी नेतृत्वकर्ताओं के निर्माण के अपने संकल्प को पुनः सुदृढ़ करता है।