जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान सुमित वधवा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित साप्ताहिक दिव्य हवन-यज्ञ के पावन अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने उपस्थित श्रद्धालुजनों को पवित्र वाणी का चिंतन कराते हुए अत्यंत गूढ़ और जीवनोपयोगी संदेश दिया। उन्होंने बाबा फरीद जी की वाणी का अनुसरण करते हुए कहा कि
*‘‘फरीदा जे तू अकलि लतीफु काले लिखु न लेख*
*आपनड़े गिरीवान महि सिरु नींवां करि देखु’’*
नवजीत भारद्वाज जी भावार्थ समझाते हुए कहते है कि हे मनुष्य! यदि तू स्वयं को बुद्धिमान मानता है, तो दूसरों की गलतियों को ढूंढने या उनकी निंदा करने में अपना समय व्यर्थ मत कर। इसके बजाय अपने गिरेबान में झांक, अपने भीतर झुककर देख कि तेरे अंदर कितनी कमियाँ और दोष छिपे हुए हैं।
नवजीत भारद्वाज जी ने बड़े ही सरल शब्दों में समझाया कि आज का मनुष्य दूसरों की कमियाँ देखने में अत्यंत तेज हो गया है। किसी की छोटी-सी गलती भी हमें तुरंत दिखाई दे जाती है, लेकिन जब अपने दोषों को देखने की बात आती है, तो हम आंखें मूंद लेते हैं। यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञानी वही है, जो पहले अपने आपको सुधारने का प्रयास करता है। जो अपने दोषों को पहचान लेता है और उन्हें दूर करने का प्रयास करता है, वही वास्तव में जीवन में आगे बढ़ता है।
उन्होंने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा *‘‘यदि कोई व्यक्ति आईने के सामने खड़ा होकर अपने चेहरे की धूल साफ करता है, तो उसका चेहरा स्वच्छ हो जाता है। लेकिन यदि वह आईने को ही गंदा कहकर उसे साफ करता रहे, तो उसका चेहरा वैसा ही बना रहेगा।’’* इसी प्रकार, जब तक हम दूसरों को सुधारने में लगे रहेंगे, तब तक हमारा स्वयं का सुधार संभव नहीं है।
प्रवचन के अंत में नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि धार्मिक जीवन का सार यही है कि मनुष्य पहले अपने भीतर झांकना सीखे, अपने अहंकार को त्यागे और विनम्रता को अपनाए। जब मनुष्य अपना सिर झुका लेता है, तो वह छोटा नहीं होता, बल्कि और भी महान बन जाता है। जैसे फल से लदा हुआ वृक्ष सदैव झुका रहता है, वैसे ही गुणों से परिपूर्ण व्यक्ति भी नम्र और विनम्र होता है।
अत: इस पावन वाणी का मूल संदेश यही है कि दूसरों में दोष ढूंढने के बजाय अपने अंदर सुधार लाना ही सच्ची भक्ति, सच्चा ज्ञान और सच्चा धर्म है।
आइए, हम सभी यह संकल्प लें कि *हम किसी की निंदा नहीं करेंगे, अपने भीतर झांककर स्वयं को बेहतर बनाएंगे और एक आदर्श जीवन जीने का प्रयास करेंगे।*

इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,प्रदीप ,जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश, मुनीष मैहरा,बलजिंदर सिंह, नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत, मनीष शर्मा,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।