जालंधर:
लिवर इंसानी शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सक्रिय अंग है, जो 500 से अधिक शारीरिक कार्यों में भूमिका निभाता है। यह पाचन, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, ऊर्जा के भंडारण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

पटेल हॉस्पिटल, जालंधर के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट एवं हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. वरुण गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि बदलती जीवनशैली, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश लिवर रोग शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होते हैं।

भारत में तेजी से बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा

डॉ. गुप्ता के अनुसार, भारत में फैटी लिवर अब एक “साइलेंट एपिडेमिक” के रूप में उभर रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 38–40% वयस्क आबादी फैटी लिवर से प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने बताया कि यह बीमारी अब केवल शराब सेवन करने वालों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मोटापा, डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रॉल और खराब जीवनशैली इसके प्रमुख कारण बन चुके हैं। चिकित्सा विज्ञान में इसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टियाटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) के रूप में जाना जाता है।

2050 तक वैश्विक स्तर पर गंभीर हो सकती है स्थिति

वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, वर्ष 2023 में लगभग 1.3 अरब लोग फैटी लिवर से प्रभावित थे, जो 2050 तक बढ़कर 1.8 अरब तक पहुंच सकते हैं। यह वृद्धि मुख्य रूप से मोटापा, उच्च रक्त शर्करा और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण हो रही है।

हेपेटाइटिस और सिरोसिस भी बड़ी चुनौती

डॉ. गुप्ता ने बताया कि लिवर रोगों में हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ भी गंभीर समस्या हैं, जो आगे चलकर लिवर सिरोसिस और कैंसर का कारण बन सकते हैं।

विश्व स्तर पर करोड़ों लोग हेपेटाइटिस से प्रभावित हैं और हर साल बड़ी संख्या में मौतें लिवर संबंधी जटिलताओं के कारण होती हैं। समय पर टीकाकरण, जांच और उपचार से इन बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहे मामले

उन्होंने बताया कि पहले लिवर रोग 40–50 वर्ष की उम्र में अधिक देखे जाते थे, लेकिन अब 20–40 वर्ष के युवाओं में भी फैटी लिवर तेजी से बढ़ रहा है।

ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना, जंक फूड का अधिक सेवन, तनाव और व्यायाम की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।

लक्षण नहीं दिखते, इसलिए नियमित जांच जरूरी

लिवर रोगों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
कुछ सामान्य संकेतों में थकान, पेट में भारीपन, भूख में कमी और वजन घटना शामिल हो सकते हैं।

डॉ. गुप्ता ने सलाह दी कि नियमित हेल्थ चेकअप और लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाना बेहद जरूरी है, जिससे बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।

स्वस्थ जीवनशैली ही सबसे बड़ा बचाव

उन्होंने बताया कि अधिकांश लिवर रोगों को सही जीवनशैली अपनाकर रोका जा सकता है:

संतुलित और कम वसा व कम चीनी वाला आहार
नियमित व्यायाम
शराब और धूम्रपान से दूरी
वजन और ब्लड शुगर का नियंत्रण
लिवर ट्रांसप्लांट: अंतिम लेकिन प्रभावी विकल्प

गंभीर मामलों में, जब लिवर पूरी तरह से खराब हो जाता है, तब लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प रहता है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण अब इसकी सफलता दर 90% तक पहुंच चुकी है।

निष्कर्ष

डॉ. गुप्ता ने कहा कि लिवर रोग आज एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है