चंडीगढ़: चंडीगढ़ में रिश्वत मामले में फंसे पंजाब पुलिस के सस्पेंड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और सह-आरोपी कृष्णु शारदा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विशेष अदालत ने सीबीआई की ओर से दायर प्रारंभिक जांच (पीई) से संबंधित अर्जी को मंजूर कर लिया। अदालत के इस फैसले के बाद जांच एजेंसी को मामले में आगे कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है।अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है, जिसमें आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। जांच एजेंसी को नए और अहम सबूत मिले हैं, जिनसे पंजाब के कई IAS-IPS अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। सीबीआई ने अज्ञात अफसरों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।
सीबीआई की ओर से दायर इस अर्जी का दोनों आरोपियों की तरफ से विरोध किया गया था। बचाव पक्ष ने अदालत में अपने अलग-अलग जवाब दाखिल करते हुए कहा कि सीबीआई की यह अर्जी कानूनी रूप से सही नहीं है। उन्होंने दलील दी कि यह अर्जी अधिकार क्षेत्र से बाहर है और कानून के निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं करती, इसलिए इसे मंजूर नहीं किया जाना चाहिए बचाव पक्ष के वकीलों ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी बिना उचित आधार के कार्रवाई करना चाहती है और इस तरह की अनुमति देने से आरोपियों के अधिकारों का हनन हो सकता है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सीबीआई की इस अर्जी को खारिज किया जाए और उन्हें किसी भी तरह की अतिरिक्त जांच की अनुमति न दी जाए। वहीं, सीबीआई की तरफ से दलील दी गई कि मामले में नए और अहम सबूत सामने आए हैं, जिनकी गहराई से जांच जरूरी है। एजेंसी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मामले की सच्चाई तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगेदोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी तथ्यों पर विचार किया और अंततः सीबीआई की अर्जी को मंजूरी दे दी। अदालत के इस फैसले से जांच एजेंसी को आगे की कार्रवाई करने और मामले की गहराई से जांच करने का अधिकार मिल गया है

सुनवाई के दौरान केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई, जिसे इस मामले में अहम कड़ी माना जा रहा है। यह रिपोर्ट उन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच के आधार पर तैयार की गई है, जिन्हें पहले जांच एजेंसी ने जब्त कर फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा था।माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट में शिकायतकर्ता और कथित बिचौलिए के बीच हुई बातचीत की ऑडियो सीडी या उससे संबंधित विश्लेषण शामिल हो सकता है। फॉरेंसिक जांच के जरिए इन ऑडियो क्लिप्स की सत्यता, एडिटिंग या छेड़छाड़ की संभावना और आवाज की पहचान जैसे पहलुओं की जांच की जाती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बातचीत असली है या नहीं।यदि रिपोर्ट में बातचीत प्रमाणित होती है, तो यह मामले में एक मजबूत साक्ष्य के तौर पर सामने आ सकती है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि कथित रूप से किस तरह रिश्वत की मांग या बातचीत की गई थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। इसी कारण CFSL रिपोर्ट को इस केस में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिस पर आगे की सुनवाई और जांच की दिशा काफी हद तक निर्भर कर सकती है।