फगवाड़ा (        )

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नोटिफ़िकेशन का जनरल समाज मंच पंजाब के जिला उपाध्यक्ष, खत्री महासभा पंजाब के महासचिव तथा भाजपा एनजीओ सैल पंजाब के कार्यकारी सदस्य रमन नेहरा ने विरोध किया है। फगवाड़ा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियम एक तरह से सामान्य वर्ग के सभी छात्र, छात्राओं को अपराधी घोषित करते हैं। ये नियम जनरल कैटेगरी विरोधी हैं। इन नियमों से जनरल वर्ग के छात्र छात्राओं का भविष्य चौपट हो जाएगा।
नए नियमों के मुताबिक, अब चाहे सरकारी कॉलेज हो या निजी यूनिवर्सिटी, हर जगह एक ‘इक्विटी सेल बनाना ज़रूरी होगा। ये सेल एक तरह की अदालत जैसा काम करेगी। अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ भेदभाव हुआ है, तो वह यहां जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। कमेटी की सिफारिश पर संस्थान को उस पर तुरंत एक्शन लेना होगा। लेकिन ये नियम बहुत अस्पष्ट और बहुत ज्यादा व्यापक हैं। नियमों में कई बातें साफ नहीं लिखी गई हैं। संस्थानों की समितियों को बहुत ज्यादा अधिकार दिए गए है। ऐसे में झूठे आरोपों से बचाव के लिए कोई मजबूत सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। अलग-अलग कॉलेजों में नियमों का गलत इस्तेमाल हो सकता है। ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ गलत तरीके से भेदभाव करते हैं, क्योंकि उन्हें मुख्य सुरक्षा से बाहर रखा गया है। रमन नेहरा ने कहा कि सामान्य वर्ग के छात्रों को उन पापों के लिए सजा देना जो उन्होंने नहीं किए, यह अन्याय को ठीक करना नहीं है, बल्कि इसे और बढ़ाना है। उन्होंने झूठी शिकायतों पर सजा देने के लिए किसी प्रावधान की कमी की भी आलोचना की, जिसके बारे में उनका कहना है कि इससे दुरुपयोग हो सकता है और निर्दोष छात्रों को नुकसान पहुंच सकता है। रमन नेहरा ने कहा कि इक्विटी कमेटी’ में सामान्य वर्ग का सदस्य नहीं होने से जांच निष्पक्ष नहीं हो सकेगी। ये सामान्य वर्ग के लोगों के ख़िलाफ़ है, क्योंकि सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के ख़िलाफ़ फ़र्जी आरोप लगाए जा सकते हैं जो उनके करियर के लिए घातक साबित हो सकते हैं।