
दिल्ली: राजधानी दिल्ली का भारत मंडपम आज एक ऐसे भविष्य का गवाह बन रहा है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दिशा और दशा तय की जा रही है। ‘ india ai impact summit 2026’ के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्माता बनकर उभरा है। इस शिखर सम्मेलन ने साबित कर दिया है कि वैश्विक मंच पर AI को लेकर होने वाली चर्चाएं अब भारत के बिना अधूरी हैं। इसी के साथ पीएम मोदी ने कहा, टेक्नोलॉजी बनाना और अपनाना दोनों भारत के DNA में है।वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा और भारत की डिजिटल शक्ति Summit के इस औपचारिक उद्घाटन सत्र में दुनिया के शक्तिशाली नेताओं की मौजूदगी ने भारत की बढ़ती साख पर मुहर लगा दी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के अद्वितीय डिजिटल इकोसिस्टम और पेमेंट सिस्टम की मुक्तकंठ से सराहना की। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक बड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी कि AI का भविष्य मुट्ठी भर अरबपतियों की इच्छा पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस तकनीक में ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की बढ़ती भागीदारी को सराहा, जिसमें भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने समिट को संबोधित करते हुए भारत के बदलते तकनीकी परिदृश्य पर आश्चर्य जताया। उन्होंने विशेष रूप से विशाखापत्तनम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह शहर एआई डेवलपमेंट के केंद्र के रूप में उभरेगा, लेकिन आज यह हकीकत है। पिचाई के अनुसार, भारत इस वक्त एक बहुत बड़ी तकनीकी छलांग लगाने की दहलीज पर खड़ा है।