हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर में प्राचार्या डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला के दिशा-निर्देशन अधीन वैदिक अध्ययन सोसाइटी द्वारा आर्य युवती सभा के सहयोग से स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के जीवन एवं शिक्षाओं विषय पर ऋषि बोध उत्सव अधीन वाद-विवाद एवं निबन्ध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा छात्राओं को स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के वैचारिक योगदान, समाज-सुधारक दृष्टि तथा शिक्षा संबंधी चिंतन से परिचित करवाना था। सपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन डीन वैदिक अध्ययन सोसाइटी डॉ. ममता एवं अध्यक्ष आर्य युवती सभा डॉ. मीनू तलवाड़ के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डीएवी गान से किया गया। मंच संचालन श्रीमती पवन कुमारी द्वारा किया गया। निर्णायक मंडल में उपस्थित अंग्रेजी विभाग से श्रीमती रितु बजाज एवं हिन्दी विभागाधयक्षा डॉ. ज्योति गोगिया का उन्होंने संक्षिप्त परिचय दिया। डॉ. ममता ने अपने वक्तव्य में छात्राओं को संबोधित करते कहा कि स्वामी दयानंद जी का राष्ट्र निर्माण, वैदिक मूल्यों तथा सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में विशिष्ट योगदान रहा है। उनकी विचारधारा आज भी समाज को सही दिशा देने में अमूल्य योगदान रखती है। छात्राओं ने स्वामी दयानन्द सरस्वती के जीवन दर्शन, सामाजिक सुधार, नारी शिक्षा, राष्ट्रवाद तथा वैदिक मूल्यों पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने पूर्ण आत्मविश्वास, स्पष्ट उच्चारण एवं तर्कपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को प्रभावित किया। प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने आयोजक टीम को बधाई दी एवं कहा कि स्वामी दयानन्द सरस्वती की विचारधारा आज के युग में उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके समय में थी। उन्होंने कहा कि सत्य, शिक्षा, समानता और सामाजिक सुधार के जिन मूल्यों का प्रतिपादन स्वामी जी ने किया, वे युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त आधार है। उन्होंने छात्राओं को स्वामी जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर जागरूक व उत्तरदायी नागरिक बनने हेतु प्रेरित किया। निर्णायक मंडल ने पूर्ण विषय की गहराई, भाषा शैली एवं प्रस्तुति के आधार पर मूल्यांकन किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में तन्वी, जान्हवी को विशिष्ट रूप से पुरस्कृत किया गया। गुरलीन प्रथम, हरप्रीत, मान्या द्वितीय, गीतांजलि, रुखसार को तृतीय स्थान से पुरस्कृत किया गया। निबंध लेखन प्रतियोगिता में अनु कुमारी प्रथम, लुमी, हरप्रीत द्वितीय, सुखमनी कौर, तन्वी तृतीय, वमिका-सांत्वना एवं जान्वी को प्रशंसा पुरस्कार से समानित किया गया। अंत में डॉ. ममता ने सभी विजित छात्राओं को बधाई दी एवं आभार व्यक्त किया।