नई दिल्ली:
पंजाब भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी श्री एस. आर. लाधड़ ने आज राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष को एक विस्तृत पत्र भेजकर राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति समुदाय के मृतकों के परिजनों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत पूर्ण राहत न देने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।

श्री लाधड़ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जो मुआवजा दिया गया है, वह सामान्य प्रशासनिक सहायता के रूप में सभी मृतकों — सामान्य वर्ग सहित — को समान रूप से दिया गया है। जबकि यदि पीड़ित अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित हैं, तो उन्हें SC/ST Act, 1989 के तहत विशेष प्रावधानों का लाभ मिलना अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिनियम के अंतर्गत निम्नलिखित सुविधाएँ अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए थीं—
1. मृतक की विधवा को ₹5,000 प्रति माह पेंशन।
2. दो बच्चों को स्नातक तक निःशुल्क शिक्षा।
3. प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवास।
4. कानून के अनुसार अतिरिक्त आर्थिक सहायता या प्राथमिकता के आधार पर सरकारी नौकरी।

श्री लाधड़ ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार ने अब तक इन प्रावधानों के अनुरूप कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। केवल सामान्य मुआवजा देकर मामले को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि कानून की भावना के विपरीत है।

उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से आग्रह किया है कि वह तत्काल हस्तक्षेप करे और जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब करे कि मृतकों के निकटतम परिजनों (NOK) को कानून के अनुसार कौन-कौन सी सुविधाएँ प्रदान की गई हैं।

श्री लाधड़ ने कहा कि अनुसूचित जाति समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर संवैधानिक और कानूनी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।