
पंजाब में जीवन-विज्ञान के क्षेत्र में एक नए युग का संकेत देते हुए डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर प्राणीशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत पुरी को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ से कृत्रिम बुद्धिमत्ता में स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। इस पाठ्यक्रम में उन्हें अत्यंत दुर्लभ “ सर्वोच्च उत्कृष्ट श्रेणी” से सम्मानित किया गया।
यह प्रमाणपत्र आईआईटी रोपड़ के निदेशक डॉ. राजीव आहूजा तथा हीरो एंटरप्राइज़ के अध्यक्ष डॉ. सुनील कांत मुंजल द्वारा प्रदान किया गया। इस उपलब्धि ने डॉ. पुरी को क्षेत्र में “वेट लैब” आधारित जीवविज्ञान और “ड्राई लैब” आधारित संगणनात्मक बुद्धिमत्ता के समन्वय के अग्रदूत के रूप में स्थापित किया है।
सामान्यतः अनेक लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल चैटबॉट्स के माध्यम से समझते हैं, किंतु डॉ. पुरी का अध्ययन उन गहन संरचनात्मक सिद्धांतों पर आधारित है जो जटिल जैविक समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक हैं। आधुनिक युग में प्राणीशास्त्र केवल प्रत्यक्ष अवलोकन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आँकड़ों और विश्लेषण पर आधारित विज्ञान बन चुका है।
जीनोमिक अनुक्रमण के क्षेत्र में डॉ. पुरी की मशीन लर्निंग तथा प्राकृतिक भाषा संसाधन में दक्षता बायोइन्फॉर्मेटिक्स के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता डीएनए की भाषा को “पढ़ने” तथा प्रोटीन संरचनाओं की भविष्यवाणी करने में सक्षम बनती है—ऐसे कार्य जिन्हें मनुष्य को पूरा करने में कई दशक लग सकते हैं।
कंप्यूटर विज़न तकनीक के प्रयोग द्वारा डॉ. पुरी अब ऐसे एआई तंत्र विकसित कर सकते हैं जो स्वतः विभिन्न जीव-प्रजातियों की पहचान कर सकें, उपग्रह चित्रों के माध्यम से प्रवासी जीवों के प्रवास-पथ का अनुगमन कर सकें तथा जैव-विविधता की स्थिति का अत्यंत सूक्ष्म और सटीक निरीक्षण कर सकें।
मूलभूत सॉफ़्टवेयर से आगे बढ़ते हुए इस पाठ्यक्रम क्रम में ऐसे डीप न्यूरल नेटवर्क भी सम्मिलित थे जो कोशिकीय परिवेश का अनुकरण करने में सक्षम हैं। इससे अनुसंधान के प्रारंभिक चरणों में पारंपरिक पशु-परीक्षण की आवश्यकता को कम किया जा सकता है।
डी.ए.वी., सी.एम.सी., नई दिल्ली के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अनूप कुमार ने कहा—
“यह एक सामान्य भ्रांति है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल अभियंताओं के लिए है। न्यूरल नेटवर्क और कंप्यूटर विज़न जैसे उन्नत सिद्धांतों में प्रवीणता प्राप्त कर डॉ. पुरी पारंपरिक प्राणीशास्त्र और आधुनिक उच्च-प्रौद्योगिकीय बायोइन्फॉर्मेटिक्स के मध्य की दूरी को समाप्त कर रहे हैं। वे हमारे विद्यार्थियों को ऐसे भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं, जहाँ एक जीवविज्ञानी को डेटा वैज्ञानिक की भूमिका भी निभानी होगी।”
आईआईटी रोपड़ के एमबीसीआईई सैटेलाइट सेंटर में आयोजित इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डॉ. पुरी ने अनेक अत्याधुनिक तकनीकी ढाँचों के साथ कार्य किया, जिनमें प्रमुख हैं—
एम8एन एवं एल.एम- नोटबुक्स — जटिल आँकड़ा-मॉडलन के लिए।
उन्नत एलएलएम (चैट जीपीटी एवं जीमनी) — वैज्ञानिक साहित्य की समीक्षा तथा अनुसंधान-संश्लेषण को स्वचालित करने के लिए।
एंटी-ग्रैविटी फ्रेमवर्क — विशिष्ट भौतिकी-आधारित जैविक अनुकरणों के लिए।
डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर इस बहुविषयी उपलब्धि के लिए डॉ. पुनीत पुरी को हार्दिक बधाई देता है। उनकी विशेषज्ञता अब महाविद्यालय के अनुसंधान प्रकोष्ठ में समाहित की जाएगी, जिससे आने वाली पीढ़ी के प्राणीशास्त्री “एल्गोरिद्मिक चिंतन” से संपन्न होकर वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग में नेतृत्व करने के लिए सक्षम बन सकें।