
डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के विद्यार्थियों द्वारा ‘नेशनल एडुट्रस्ट ऑफ़ इंडिया’ के सहयोग से आरंभ की गई 14-दिवसीय ‘हरित भारत पर्यावरणीय प्रभाव चुनौती’ का आज सातवां दिन था। इस चुनौती का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने किया। इस अवसर पर स्नातकोत्तर अंग्रेज़ी विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रोफेसर शोरी तथा प्रोफेसर सुभाष विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही महाविद्यालय के उप-प्राचार्य, कुलसचिव तथा उप-कुलसचिव भी कार्यक्रम में सम्मिलित थे।
इस चुनौती के अंतर्गत प्रतिदिन एक विशेष गतिविधि निर्धारित की गई है, जिसे उसी दिन पूर्ण किया जाना आवश्यक है। इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं को पर्यावरण संबंधी समस्याओं तथा उनके संभावित समाधानों के प्रति जागरूक करना है।
प्रथम दिन नोडल अधिकारी डॉ. शरणजीत संधू ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा विद्यार्थियों ने ‘हरित प्रतिज्ञा’ ली। उन्होंने सभी से स्थायी और सुरक्षित भविष्य के लिए कार्य करने का आग्रह किया।
द्वितीय दिन की गतिविधि कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता पर केंद्रित रही। डॉ. कोमल नारंग ने विद्यार्थियों को सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखने के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कचरे का पृथक्करण करने से कचरे के ढेर कम होते हैं और पर्यावरण स्वच्छ बना रहता है। उन्होंने सूखे कचरे के पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग के उपाय बताए तथा गीले कचरे से खाद बनाने की विधि भी समझाई।
तृतीय दिन ‘वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस’ के अवसर पर विषय के रूप में ई-कचरा प्रबंधन चुना गया। इस दिन “ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण” पर एक जागरूकता सत्र आयोजित किया गया तथा ई-कचरा संग्रह अभियान भी सफलतापूर्वक संचालित किया गया। इस सत्र में डॉ. रीना देवी ने ई-कचरे की बढ़ती समस्या और इसके पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ई-कचरे के उचित प्रबंधन और पुनर्चक्रण की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
चतुर्थ दिन जल संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु समर्पित रहा। डॉ. साहिब सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जल संरक्षण की आवश्यकता तथा उसके व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की। उन्होंने अपने वक्तव्य का समापन इन शब्दों में किया—
“कोख, वृक्ष और पानी—यदि इन्हें न संभाला जाए, तो जीवन की कहानी ही समाप्त हो जाएगी।”
पांचवे दिन ऊर्जा संरक्षण को विषय बनाया गया। इस अवसर पर डॉ. रीना द्वारा जागरूकता भाषण दिया गया तथा गूगल फॉर्म के माध्यम से एक लघु प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
षष्ठम दिन की गतिविधि डॉ. शिवानी वर्मा द्वारा “औषधीय पौधों की पहचान” विषय पर संचालित की गई। यह सत्र महाविद्यालय के औषधीय उद्यान में आयोजित हुआ।
आज सातवें दिन महाविद्यालय के औषधीय उद्यान में डॉ. लवलीन के निर्देशन में औषधीय पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. कोमल अरोड़ा तथा डॉ. नवजीत शर्मा चुनौती के प्रत्येक दिन उपस्थित रहकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते रहे।