जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान उदय राजपूत से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन के अवसर पर उपस्थित मां बगलामुखी के युवा भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि आध्यात्मिक जीवन केवल वृद्धावस्था में ही अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यात्म जीवन के अंतिम पड़ाव का सहारा नहीं, बल्कि जीवन के हर चरण का आधार है, विशेष रूप से युवावस्था का।
उन्होंने युवाओं को समझाते हुए कहा कि यदि जीवन के सुनहरे काल यानी यौवन में ही व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को सही दिशा में नहीं ढालता, तो आगे चलकर वह कई प्रकार की मानसिक, सामाजिक और नैतिक समस्याओं का सामना करता है। इसलिए जरूरी है कि युवावस्था में ही आत्मचिंतन, आत्मसंयम और आत्मविकास की नींव रखी जाए।
अध्यात्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए नवजीत भारद्वाज जी ने एक प्रेरक प्रसंग साझा किया, जिसमें महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम से कहा था, हे राम! मनुष्य को अपने आत्मकल्याण का पुरुषार्थ युवावस्था में ही कर लेना चाहिए, क्योंकि बुढ़ापे में शरीर भी साथ नहीं देता। इस उदाहरण के माध्यम से उन्होंने बताया कि समय रहते आत्मिक उन्नति का प्रयास करना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को समझाते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में अधिकतर युवा अध्यात्म को गैर-जरूरी या जीवन की प्रगति में बाधा मान लेते हैं। कई युवाओं को यह भ्रम होता है कि अध्यात्म अपनाने से जीवन में कठोर अनुशासन और नियमों का पालन करना पड़ेगा, जिससे उनकी स्वतंत्रता सीमित हो जाएगी। जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। अध्यात्म व्यक्ति को अनुशासन के साथ-साथ सही दिशा, स्पष्ट सोच और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने यह भी कहा कि अध्यात्म कोई अलग मार्ग नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है, जो व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और संतुलन का संचार करती है। यह मन को स्थिर करता है, विचारों को शुद्ध करता है और व्यक्ति को हर परिस्थिति में मजबूत बनाए रखता है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने भीतर छिपी अपार क्षमता को पहचानें और उसे सही दिशा में प्रयोग करें। अध्यात्म के माध्यम से वे न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते-भागते अपने मानसिक संतुलन और आंतरिक शांति को खोता जा रहा है। धन, पद और प्रतिष्ठा होने के बावजूद भी मन में खालीपन बना रहता है। सच्ची शांति, स्थिरता, प्रेम और संतोष केवल आध्यात्मिकता के माध्यम से ही प्राप्त किए जा सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि युवा वर्ग अपने जीवन में अध्यात्म को अपनाएं, ताकि वे एक संतुलित, सफल और सार्थक जीवन जी सकें।

इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, राकेश प्रभाकर,सरोज बाला,विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,जानू थापर,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,धर्मपालसिंह, अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत, मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा,अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,प्रिंस कुमार,दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल,अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।